भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। समझौते की शर्तों को लेकर जहां भारतीय सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों के दावे कई नए सवाल खड़े कर रहे हैं। ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ऐसे दावे किए हैं, जिन्हें लेकर भारत में राजनीतिक और आर्थिक हलकों में चर्चाएं तेज़ हो गई हैं।
इसी कड़ी में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर शून्य करने की तैयारी में है। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप और भारत के बीच हुए तथाकथित ‘ऐतिहासिक समझौते’ से अमेरिकी किसानों और उत्पादकों को भारतीय बाजार में सीधी और व्यापक पहुंच मिलेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत भारत को कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों के आयात पर सुरक्षा बनाए रखने की अनुमति दी गई है।
पीयूष गोयल का बयान क्या संकेत देता है?भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मीडिया से बातचीत में लगभग 20 मिनट का संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच की मित्रता को मजबूत बताते हुए कहा कि प्रस्तावित समझौता देश के 140 करोड़ नागरिकों के हित में होगा। गोयल ने संकेत दिए कि बातचीत अपने अंतिम चरण में है और समझौते को जल्द ही औपचारिक रूप से अंतिम रूप देकर उस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस सप्ताह के भीतर दोनों देशों की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर का बड़ा दावासीएनबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में जैमीसन ग्रीर ने दावा किया कि भारत में कई अमेरिकी उत्पादों—जैसे मेवे, शराब, स्पिरिट, फल और सब्जियों—पर टैरिफ पूरी तरह समाप्त किए जाने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने चावल, सोयाबीन, चीनी और दुग्ध उत्पादों का कोई उल्लेख नहीं किया। गौर करने वाली बात यह है कि ये वही उत्पाद हैं, जिन्हें भारत ने यूरोपीय संघ के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते में भी बाहर रखा था, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कुछ क्षेत्रों में भारत अब भी सतर्क रुख अपनाए हुए है।
ट्रंप के दावे और बढ़ती बहसडोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर एक बार फिर चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री उनके “सबसे अच्छे दोस्तों” में से एक हैं और भारत ने 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदने, अमेरिका पर टैरिफ शून्य करने और रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका की नजर में रूस से भारत द्वारा की जा रही तेल खरीद अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को आर्थिक समर्थन दे रही थी।
आंकड़े और सवालट्रंप के इन बयानों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया में केवल 18 फीसदी टैरिफ का उल्लेख किया, लेकिन समझौते के विस्तृत ब्योरे पर कोई टिप्पणी नहीं की। वर्तमान में भारत अमेरिका से सालाना 50 अरब डॉलर से भी कम का आयात करता है। ऐसे में इस आंकड़े को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना कितना व्यावहारिक है, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं, जिससे यह साफ है कि ट्रेड डील को लेकर राजनीतिक बहस अभी थमने वाली नहीं है।