पश्चिम एशिया में जारी ईरान–इजरायल संघर्ष का असर अब भारत तक महसूस किया जा रहा है। इस युद्ध के बीच राजस्थान के एक युवा नाविक की दर्दनाक मौत की खबर सामने आई है। नागौर जिले के रहने वाले 24 वर्षीय दलीप सिंह की ओमान के खासाब बंदरगाह के पास फारस की खाड़ी के समुद्री मार्ग पर चल रहे एक तेल टैंकर पर हुए हमले में जान चली गई। बताया जा रहा है कि 1 मार्च को एमवी स्काईलाइट नामक जहाज पर हुए मिसाइल हमले के दौरान यह हादसा हुआ। बुधवार को शिपिंग कंपनी ने आधिकारिक रूप से उनकी मौत की पुष्टि की, जिसके बाद उनके गांव खींवताना में गहरा शोक फैल गया।
दलीप सिंह ने हाल ही में अपना समुद्री करियर शुरू किया था। इसी वर्ष 22 जनवरी को वे मर्चेंट नेवी में भर्ती हुए थे और पलाऊ के झंडे वाले एक ऑयल व केमिकल टैंकर एमवी स्काईलाइट पर क्रू मेंबर के रूप में कार्य कर रहे थे। परिवार के अनुसार, 28 फरवरी को उनसे आखिरी बार बातचीत हुई थी और उस समय सब कुछ सामान्य था। लेकिन अगले ही दिन सुबह हुए हमले ने परिवार की खुशियों को अचानक मातम में बदल दिया।
परिजनों का कहना है कि दलीप ने यह नौकरी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से स्वीकार की थी। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी ड्यूटी की शिफ्ट बदलकर एक अन्य क्रू सदस्य की जगह काम संभाला था। इसी दौरान जहाज पर हमला हुआ। यह घटना उस समय हुई जब एमवी स्काईलाइट जहाज ओमान के तट के समीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास लंगर डाले खड़ा था, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
दलीप सिंह अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उन्होंने हाल ही में समुद्री क्षेत्र में कदम रखा था और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का सपना देख रहे थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही गांव और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल छा गया। परिवार और ग्रामीणों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस कठिन समय में परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और संघर्ष प्रभावित समुद्री इलाकों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र ने प्रारंभिक जानकारी में बताया कि जहाज पर आग लगने की वजह या तो ईरान की ओर से दागी गई मिसाइल हो सकती है या फिर विस्फोटक से लदी किसी ड्रोन बोट की टक्कर। हालांकि इस घटना की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, एक प्रोजेक्टाइल जहाज के आगे वाले हिस्से यानी बो से टकराया, जिसके बाद जोरदार विस्फोट हुआ और जहाज में आग लग गई। इस धमाके से जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और उसी स्थान पर ड्यूटी कर रहे दलीप सिंह इसकी चपेट में आ गए।
घटना के तुरंत बाद शुरू में दलीप सिंह को लापता बताया गया था और उनकी तलाश के लिए अभियान चलाया गया। उसी जहाज के कैप्टन आशीष, जो बिहार के निवासी थे, उनका शव पहले ही बरामद कर लिया गया था। बाद में तलाश अभियान के दौरान दलीप सिंह के भी जीवित होने की उम्मीद खत्म हो गई और उनकी मौत की पुष्टि कर दी गई।
शिपिंग कंपनी के मुताबिक, हमले के समय जहाज पर कुल 20 क्रू मेंबर मौजूद थे। इनमें 15 भारतीय और 5 ईरानी नागरिक शामिल थे। हमले के बाद चलाए गए बचाव अभियान में अधिकांश लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन तीन क्रू सदस्य शुरू में लापता बताए गए थे। बाद में उनमें से दो की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
यह हमला होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक हुआ, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या हमला अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी व्यापक भू-राजनीतिक तनाव के चलते समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। ऐसे हालात में अंतरराष्ट्रीय जहाजों और उनमें काम करने वाले नाविकों के लिए जोखिम लगातार बढ़ रहा है।