ईरान पर हो रहे हमलों को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस तेज हो गई है। अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है और इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यह अभियान अभी थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका के रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े सभी उद्देश्य हासिल नहीं हो जाते, तब तक ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। ट्रंप ने इसे अपने चुनावी और कूटनीतिक वादों की पूर्ति बताया और दावा किया कि उन्होंने वही किया है, जिसका आश्वासन अमेरिकी जनता को दिया था।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि पिछले 36 घंटों से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान में व्यापक सैन्य अभियान छेड़ रखा है। उनके अनुसार, इस दौरान सैकड़ों ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के अड्डे और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है—नौ युद्धपोतों को ध्वस्त कर दिया गया और नेवी मुख्यालय को भी तबाह कर दिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि ईरान का शीर्ष सैन्य ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। ट्रंप के मुताबिक, सैन्य कमान के अधिकतर वरिष्ठ अधिकारी या तो मारे जा चुके हैं या फिर आत्मसमर्पण करने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद देश के भीतर हालात तेजी से बदल रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर लोग सड़कों पर जश्न मनाते दिखाई दिए, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
युद्ध की अवधि को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने दो टूक कहा कि यह अभियान तब तक चलेगा, जब तक अमेरिका को यह भरोसा नहीं हो जाता कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताएं पूरी तरह निष्क्रिय कर दी गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लंबी दूरी की मिसाइलों और संभावित परमाणु हथियारों से लैस ईरानी शासन वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। अमेरिका किसी भी ऐसी ताकत को, जो आतंकी संगठनों को समर्थन देती हो, विनाशकारी हथियार रखने की इजाजत नहीं देगा।
अपने संबोधन में ट्रंप ने पिछले कई दशकों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ कट्टरपंथी नारों और हिंसक गतिविधियों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ईरान को “आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक” करार देते हुए कहा कि यह कार्रवाई भविष्य के खतरों को रोकने के लिए अनिवार्य है।
ट्रंप ने ईरान की सेना, रिवोल्यूशनरी गार्ड और पुलिस बल से अपील की कि वे हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दें, ताकि उन्हें सुरक्षा मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग विरोध जारी रखेंगे, उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ईरान के नागरिकों से उन्होंने आह्वान किया कि जो लोग स्वतंत्रता की चाह रखते हैं, वे इस मौके का फायदा उठाएं और साहस दिखाएं।
अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने कहा, “मैंने जो वादा किया था, उसे पूरा कर दिया है।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि यह संघर्ष कितने समय तक चलेगा और क्या कूटनीतिक प्रयास किसी बड़े युद्ध को टालने में सफल हो पाएंगे।