अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति को गरमा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा जीत का ऐलान और सख्त चेतावनी देने के तुरंत बाद ईरान ने इजरायल की दिशा में मिसाइलें दागकर जवाब दिया। इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अब आगे अमेरिका की रणनीति क्या होगी और हालात किस दिशा में जाएंगे।
गुरुवार को ईरान ने इजरायल की ओर कई मिसाइलें दागीं। यह हमला उस समय हुआ जब ट्रंप राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपने सैन्य अभियान Operation Epic Fury का जिक्र कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने ईरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि वह अपनी आक्रामक गतिविधियों को तुरंत रोके और वार्ता का रास्ता अपनाए। उनके इस अल्टीमेटम के तुरंत बाद ईरान की यह कार्रवाई स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना गई।
इजरायल की सेना ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों का पता चलते ही उनकी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी गई। सेना के अनुसार, कुछ ही घंटों के भीतर यह तीसरा मौका था जब ईरान की तरफ से मिसाइल हमला किया गया। इजरायली रक्षा तंत्र लगातार इन हमलों को निष्क्रिय करने में जुटा रहा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तरी इजरायल में एयर रेड सायरन गूंज उठे, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। हालांकि, फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
अपने संबोधन में Donald Trump ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि आने वाले दो से तीन हफ्ते ईरान के लिए बेहद भारी साबित हो सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका पूरी तैयारी के साथ निर्णायक कार्रवाई के करीब पहुंच चुका है। ट्रंप ने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो ईरान को “स्टोन एज” यानी पत्थर युग जैसी स्थिति में पहुंचा दिया जाएगा। उनके बयान ने साफ कर दिया कि अमेरिका पीछे हटने के मूड में नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन हालिया घटनाओं के चलते ईरान की राजनीतिक स्थिति में परिवर्तन जरूर देखने को मिला है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका का उद्देश्य सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन नहीं था, फिर भी मौजूदा हालात ने एक नया मोड़ ले लिया है। ट्रंप ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर निर्धारित समयसीमा के भीतर कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के बिजली उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाकर व्यापक हमला किया जा सकता है।
इस पूरे संघर्ष की जड़ें 28 फरवरी को शुरू हुई उस सैन्य कार्रवाई में हैं, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर अचानक हवाई हमले किए थे। इस अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। अमेरिका ने इस ऑपरेशन को Operation Epic Fury नाम दिया, जबकि इजरायल ने इसे Operation Roaring Lion के तौर पर अंजाम दिया।
मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस स्तर तक बढ़ सकता है। एक तरफ जहां अमेरिका अपनी सख्त नीति पर कायम है, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई से पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक समाधान निकल पाएगा या यह टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।