अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटाने के लिए कड़ा संदेश भेजा है। उन्होंने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बिना किसी शर्त और धमकी के तुरंत खोल दे, नहीं तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करेगा।
ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्र से शुरू होगी कार्रवाईट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की शुरुआत ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्र से की जाएगी। उनका यह बयान क्षेत्रीय तनाव के बीच आया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश के अंत में कड़े शब्दों में कहा कि इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।
नेतन्याहू का कार्यकाल और ईरान का मुद्दाइजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार का चार साल का कार्यकाल जल्द पूरा होने वाला है और अक्टूबर में आम चुनाव प्रस्तावित हैं। राजनीतिक विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि नेतन्याहू संसद को जल्द भंग करवा कर समय से पहले चुनाव करवा सकते हैं।
हालांकि, देश की सुरक्षा परिस्थितियां और युद्ध प्रभावित क्षेत्र—जैसे गाजा और वेस्ट बैंक—सवाल खड़े कर रहे हैं। ईरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष और हिज़बुल्ला के हमलों ने इजरायल के भीतर सुरक्षा की स्थिति को और जटिल बना दिया है।
हिजबुल्ला की जवाबी कार्रवाईहिज़बुल्ला के लड़ाके भी लगातार इजरायल पर रॉकेट हमले कर रहे हैं। इस स्थिति का समाधान कब होगा, फिलहाल कहा नहीं जा सकता।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नेतन्याहू युद्ध के दौरान बढ़ी राष्ट्रवादी भावना का लाभ उठाने के लिए जल्द चुनाव करवा सकते हैं। लेकिन लंबित ईरान युद्ध और उससे होने वाला नुकसान चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है।
ईरान युद्ध और इजरायली चुनाव का संबंधअगर इजरायल ईरान पर विजय प्राप्त करता है और लेबनान की नई जमीन पर कब्जा करता है, तो नेतन्याहू के लिए जल्द चुनाव कराना फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में उन पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर फैसले की मांग कमजोर पड़ सकती है। वैसे, नेतन्याहू को आरोपों से मुक्त करने की याचिका राष्ट्रपति कार्यालय में लंबित है।
हर हाल में, ईरान युद्ध इजरायली चुनाव का मुख्य मुद्दा बना रहेगा। चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों के लिहाज से यह मामला नेतन्याहू के लिए निर्णायक साबित होने वाला है।