वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक हालात को “अत्यंत चुनौतीपूर्ण और असुरक्षित” करार देते हुए वर्ष 2027 के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर के विशाल रक्षा बजट का प्रस्ताव पेश किया है। यह आंकड़ा 2026 के अनुमानित 901 अरब डॉलर के सैन्य खर्च से कहीं अधिक है और इसे अब तक का सबसे बड़ा अमेरिकी रक्षा बजट माना जा रहा है।
ट्रंप का यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ ही दिन पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने और अमेरिका में ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सैन्य अभियान शुरू किया गया था। इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने कैरेबियन क्षेत्र में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिससे पूरे इलाके में तनाव और अस्थिरता बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
हाल के दिनों में ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए डेनमार्क के अधीन ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की इच्छा भी जाहिर की है। इसके अलावा, कोलंबिया में संभावित सैन्य हस्तक्षेप को लेकर भी संकेत दिए गए हैं। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका अपने विरोधी देशों को किसी भी हाल में चुनौती देने से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस रक्षा बजट को देश की सुरक्षा के लिए निर्णायक बताते हुए लिखा, “यह प्रस्ताव हमें वह आदर्श और शक्तिशाली सैन्य ढांचा प्रदान करेगा, जिसके अमेरिका हकदार है। इससे हम हर संभावित दुश्मन के खिलाफ पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि उनके प्रशासन द्वारा लागू किए गए अंतरराष्ट्रीय टैरिफ और शुल्कों से मिलने वाले अतिरिक्त राजस्व ने इस बड़े सैन्य खर्च को संभव बनाया है।
यह रक्षा बजट प्रस्ताव अब अमेरिकी कांग्रेस में तीखी बहस का कारण बन सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता इसे अनावश्यक खर्च बताते हुए अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव की बात कह सकते हैं। वहीं, ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि चीन और रूस जैसे देशों से बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा खतरों को देखते हुए यह कदम अपरिहार्य है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस बजट से अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों, साइबर डिफेंस और स्पेस फोर्स में बड़े पैमाने पर निवेश होगा, जिससे वैश्विक मंच पर अमेरिका की सैन्य और रणनीतिक पकड़ और मजबूत हो सकती है।