पश्चिम बंगाल में सत्ता समीकरण बदलने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष और टूट की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं। पहले जहां कई प्रशासनिक अधिकारी और करीबी माने जाने वाले लोग पार्टी से दूरी बनाते नजर आए, वहीं अब राजनीतिक चेहरे भी खुलकर पाला बदलते या संगठन से अलग होते दिख रहे हैं। कुछ नेताओं ने तो सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि टीएमसी का जनता से जुड़ाव कमजोर पड़ गया है, जिसका असर चुनावी नतीजों में साफ दिखाई दिया। इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच बैरकपुर से पूर्व विधायक और फिल्ममेकर राज चक्रवर्ती ने भी टीएमसी से किनारा करते हुए राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है।
“राजनीति मेरे लिए नहीं है” – राज चक्रवर्ती का बड़ा फैसलाराज चक्रवर्ती का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ दिनों से टीएमसी के कई पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं। इन नेताओं का कहना है कि संगठन के भीतर अहंकार बढ़ गया था और जमीनी कार्यकर्ताओं से दूरी बन गई थी, जिसकी वजह से जनता का भरोसा कमजोर हुआ और चुनाव परिणाम प्रभावित हुए।
सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए राज चक्रवर्ती ने लिखा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी, जब जनता ने उन्हें सेवा का अवसर दिया। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों तक उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ विधायक के रूप में काम करने की कोशिश की और जनता से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे। लेकिन अब 2026 के साथ उनका यह अध्याय समाप्त हो चुका है और इसी के साथ वे राजनीति से भी अलग हो रहे हैं।
टीएमसी में बढ़ती असहमति और खुलते बयानराज चक्रवर्ती के फैसले के साथ ही टीएमसी के भीतर असंतोष की आवाजें और तेज हो गई हैं। पार्टी के ही एक सांसद और अभिनेता देव ने जहां भाजपा को जीत की बधाई दी और इसे जनादेश बताया, वहीं उन्होंने यह भी अपील की कि नई सरकार बंगाल में ऐसा प्रशासन दे जो समाज में एकता और सौहार्द को मजबूत करे। यह रुख पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग माना जा रहा है, क्योंकि ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं और इस्तीफा देने से इनकार किया है।
इसी बीच पूर्व मंत्री रबींद्रनाथ घोष ने भी संगठन के भीतर गहरी दरार की बात कही है। उनका दावा है कि पार्टी अब दो गुटों में बंट चुकी है—एक ममता बनर्जी का और दूसरा अभिषेक बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र।
“अभिषेक का दबाव बढ़ता गया” – पूर्व मंत्री का दावारबींद्रनाथ घोष ने आरोप लगाया कि संगठन में अभिषेक बनर्जी का प्रभाव लगातार बढ़ता गया और कई फैसलों पर उनका दबाव देखा गया। उनके अनुसार, कई बार निर्णयों में शीर्ष नेतृत्व पर भी प्रभाव डालने की स्थिति बनी, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष गहराता गया।
इसके अलावा पूर्व क्रिकेटर और पूर्व मंत्री रहे मनोज तिवारी ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 2026 के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया और इसके पीछे पैसों की मांग जैसे आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और अधिक चर्चा में आ गई है।
टीएमसी में बढ़ती अंदरूनी खींचतानइन सभी घटनाओं के बीच टीएमसी के भीतर मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं। कई नेता खुले तौर पर नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं और संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति पार्टी के लिए आने वाले समय में और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि अंदरूनी एकता पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, जहां टीएमसी न सिर्फ विपक्ष के हमलों का सामना कर रही है, बल्कि अपने ही नेताओं के बयानों से भी घिरी नजर आ रही है।