कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फालता से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय नेता जहांगीर खान को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सोमवार को भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से पकड़े गए जहांगीर खान को मंगलवार को डायमंड हार्बर कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद न्यायालय ने उन्हें 5 दिनों की पुलिस रिमांड में भेजने का आदेश दिया। इलाके में उन्हें लोग उनके उपनाम ‘पुष्पा’ के नाम से भी जानते हैं।
नेपाल सीमा के पास से हुई गिरफ्तारीसूत्रों के अनुसार, बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद से ही जहांगीर खान लगातार फरार चल रहे थे और पुलिस को चकमा देते आ रहे थे। उनके खिलाफ कथित तौर पर वसूली, धमकी और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। पुलिस लंबे समय से उनकी तलाश में जुटी थी और कई स्थानों पर छापेमारी भी की जा रही थी। आखिरकार खुफिया इनपुट के आधार पर सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के नजदीक से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जब वे कथित रूप से देश छोड़कर भागने की कोशिश में थे।
बताया जा रहा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा को 26 मई को वापस ले लिया गया था। सुरक्षा हटने के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी और इसी दौरान आरोपी के पास फरार होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
‘पुष्पा’ नाम से क्यों चर्चाओं में आए?जहांगीर खान का नाम पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान अचानक सुर्खियों में आया था। उस समय कानून-व्यवस्था की निगरानी के लिए तैनात यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा से उनकी तीखी नोकझोंक सामने आई थी। आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अधिकारी को चुनौती देते हुए फिल्मी अंदाज में खुद को ‘पुष्पा’ कहा था और यह दावा किया था कि वह किसी के सामने झुकेंगे नहीं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उन्हें ‘फालता का पुष्पा’ कहकर संबोधित किया जाने लगा था। हालांकि अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और वही नेता पुलिस हिरासत में हैं, जहां उनसे लगातार पूछताछ जारी है।
फालता सीट पर दोबारा हुआ था मतदानगौरतलब है कि फालता विधानसभा सीट पर 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी और चुनावी अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए थे। इन शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने परिणाम रद्द करते हुए 21 मई को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया था।
दूसरी बार हुए इस चुनाव में मतदान से ठीक पहले TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के हटने के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान संपन्न हुआ। नतीजों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने भारी अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पर 1,09,021 वोटों की बढ़त बनाई, जबकि माकपा दूसरे स्थान पर रही और तृणमूल कांग्रेस को करारी हार और जमानत जब्ती का सामना करना पड़ा।