पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक दर्जन से अधिक सांसदों ने बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। यह मुलाकात उनके दिल्ली स्थित आवास पर हुई, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा और अटकलों को जन्म दे दिया है। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी अधिक राजनीतिक रूप से अहम बना दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें टीएमसी के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली सांसद शामिल हुए हैं। इनमें शताब्दी रॉय, जगदीश बसुनिया और कालीपदा सोरेन जैसे नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इसके अलावा अन्य सांसद भी इस मुलाकात का हिस्सा रहे, जिससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है।
बैठक में शामिल सांसदों की सूची इस प्रकार सामने आई है, जिसमें काकली घोष दस्तीदार (बारासात), प्रसून बनर्जी (हावड़ा), शताब्दी रॉय (बीरभूम), असीत माल (बोलपुर), बापी हलदार (मथुरापुर), जून मालिया (मेदिनीपुर), जगदीश बसुनिया (कूचबिहार), कालीपदा सोरेन (झाड़ग्राम), अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा), पार्थ भौमिक (बैरकपुर) और शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व) जैसे सांसद शामिल बताए जा रहे हैं।
सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव, कई सांसद बागी रुख मेंटीएमसी के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान के बीच कई सांसदों ने खुलकर असंतोष जाहिर करना शुरू कर दिया है। इस बैठक में कुछ सांसद ऐसे भी मौजूद रहे जिन्होंने पार्टी नेतृत्व से दूरी बनानी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि शर्मिला सरकार और अरूप चक्रवर्ती समेत कई सांसद इस मुलाकात में शामिल हुए, जिससे राजनीतिक संकेत और मजबूत हो गए हैं।
इसी बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने आज ही टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने पार्टी के भीतर चल रहे संकट को और गहरा कर दिया है और राजनीतिक गलियारों में इसे बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस्तीफा पत्र में गंभीर आरोप, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का जिक्रपार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को लिखे अपने त्यागपत्र में सुखेंदु शेखर रॉय ने तीखे शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल की जनता अब पार्टी के भीतर व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और प्रशासनिक विफलताओं से परेशान हो चुकी है। पत्र में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में गंभीर अव्यवस्था का उल्लेख करते हुए असंतोष जताया।
उनके अनुसार, राज्य में विभिन्न स्तरों पर फैली अराजकता ने जनता का भरोसा कमजोर किया है और यही कारण है कि राजनीतिक असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
बीजेपी की सराहना और नए राजनीतिक संकेतअपने पत्र में सुखेंदु शेखर रॉय ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली की भी सराहना की है। उन्होंने लिखा कि बंगाल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार मतदाताओं ने बीजेपी को उल्लेखनीय समर्थन दिया है और जनता ने बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नई राजनीतिक स्थिति में विकास और पुनर्निर्माण की दिशा में कई प्रयास शुरू किए गए हैं।
बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच नई रणनीति की अटकलेंपश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी में टूट और असंतोष की खबरों के बीच यह भी चर्चा तेज हो गई है कि कई बागी सांसद बीजेपी में शामिल होने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
दिल्ली में हो रही इन बैठकों ने राजनीतिक हलकों में हलचल और बढ़ा दी है। वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी भी दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक में मौजूद हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।