एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकीं एथलीट स्वप्ना बर्मन इन दिनों अपने राजनीतिक फैसले को लेकर गहरे तनाव और उलझन में बताई जा रही हैं। तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी दोनों में चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। खबरों के मुताबिक, वह अब राजनीति में आने के अपने निर्णय पर सवाल उठाने लगी हैं। हाल ही में उनके घर में आग लगने की घटना भी सामने आई, जिसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसके अलावा यह भी चर्चा है कि चुनावी हार के बाद उनके कुछ रिश्तेदारों ने भी उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी है।
घर में आग लगने से बढ़ी चिंताटेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार रात स्वप्ना बर्मन के आवास पर अचानक आग लग गई, जिससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह आग किसी असामाजिक तत्वों द्वारा लगाई गई हो सकती है।
घटना के बाद शनिवार को वह जलपाईगुड़ी कोतवाली थाने पहुंचीं और पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। खास बात यह रही कि उस समय उनके साथ तृणमूल कांग्रेस का कोई भी स्थानीय नेता मौजूद नहीं था। उल्लेखनीय है कि राजनीति में प्रवेश के चलते उन्हें अपनी रेलवे की स्थायी नौकरी भी छोड़नी पड़ी थी।
चुनावी मैदान में भाजपा उम्मीदवार से मिली हारस्वप्ना बर्मन ने रायगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार दिनेश सरकार से हुआ। इस चुनाव में उन्हें लगभग 21 हजार वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
इसी बीच शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेता जैसे महुआ गोपी, प्रकाश सी बराईक और अष्टमी रॉय उनके घर पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रकाश सी बराईक ने कहा कि पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर वे स्वप्ना से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन स्वप्ना बर्मन देश की एक महत्वपूर्ण खेल प्रतिभा हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।
स्वप्ना बर्मन की भावनात्मक प्रतिक्रियाफरवरी में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं स्वप्ना बर्मन को पार्टी ने खगेश्वर रॉय की जगह टिकट दिया था। हाल की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वह अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।
उन्होंने भावुक होकर कहा, “मुझे नहीं पता था कि राजनीति इतनी कठिन और मानसिक रूप से थका देने वाली होगी, वरना मैं इस क्षेत्र में कभी कदम नहीं रखती।”
सूत्रों के अनुसार, चुनावी हार के बाद उनके कुछ रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने भी उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी है। वहीं स्वप्ना ने भविष्य को लेकर कहा कि वह लंबे समय से खेल से जुड़ी रही हैं, लेकिन राजनीति का अनुभव बिल्कुल अलग है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह अभी अपने आगे के निर्णयों पर विचार कर रही हैं।
पार्टी गतिविधियों से दूरी और अनिश्चित भविष्यरिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि आग की घटना के बाद से स्वप्ना बर्मन पार्टी की गतिविधियों से काफी हद तक दूर हो गई हैं। कुछ टीएमसी नेताओं का कहना है कि वह अब उनके फोन कॉल्स का जवाब भी नहीं दे रही हैं।
इसी बीच उनके भविष्य को लेकर आर्थिक चुनौतियों की आशंका भी जताई जा रही है। करीबी सूत्रों के मुताबिक, रेलवे की नौकरी छोड़ने और चुनावी हार के बाद उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा खेल करियर पर भी इसका असर पड़ा है, क्योंकि वह इसी साल अगस्त में होने वाले एशियन गेम्स के लिए दो क्वालिफाइंग राउंड में हिस्सा नहीं ले पाईं। ऐसे में अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी के लिए कम से कम दो साल का इंतजार करना पड़ सकता है।