शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में धनबाद तक पहुंची जांच, SIT की देर रात छापेमारी में बड़ा खुलासा—बाइक नंबर पर हुआ फर्जीवाड़ा

पश्चिम बंगाल की सियासत से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ देव की हत्या की जांच अब झारखंड के धनबाद तक पहुंच गई है। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड की तह तक जाने के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) बीती रात अचानक धनबाद पहुंचा और पाथरडीह थाना क्षेत्र में घंटों तक गहन पूछताछ व जांच की गई।

इस दौरान जांच टीम को एक अहम सुराग हाथ लगा, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। सामने आया कि वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक का नंबर असली नहीं था, बल्कि उसे फर्जी तरीके से लगाया गया था। यह नंबर धनबाद में कार्यरत सेल (SAIL) कर्मचारी विभाष भट्टाचार्य की बाइक से चोरी कर दूसरी बाइक पर इस्तेमाल किया गया था।

6 मई की रात हुआ था चंद्रनाथ देव का मर्डर, पूरे राज्य में मचा था हड़कंप

गौरतलब है कि 6 मई की रात उत्तर 24 परगना जिले में चंद्रनाथ देव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने पूरे बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया था। घटना के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने तत्काल SIT का गठन किया था, ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके।

जांच के शुरुआती चरण में यह सामने आया था कि अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की गई बाइक का नंबर “JH” सीरीज का था, जिससे मामला झारखंड से जुड़ता हुआ नजर आया और जांच की दिशा बदल गई।

जांच की कड़ी धनबाद तक पहुंची, बाइक असल मालिक के नाम पर रजिस्टर्ड निकली

जैसे-जैसे SIT ने जांच आगे बढ़ाई, सुराग धनबाद के पाथरडीह क्षेत्र तक पहुंच गया। यहां जांच में पता चला कि जिस बाइक का उपयोग अपराधियों ने किया था, वह दरअसल विभाष भट्टाचार्य के नाम पर रजिस्टर्ड है, जो वर्तमान में धनबाद के चासनाला कार्यालय में तैनात हैं।

विभाष मूल रूप से पश्चिम बंगाल के बर्नपुर के रहने वाले हैं और कुछ साल पहले उनका स्थानांतरण झारखंड हुआ था। इस खुलासे के बाद जांच टीम ने उनके रिकॉर्ड और गतिविधियों की गहराई से पड़ताल शुरू की।
सीसीटीवी फुटेज से साबित हुआ सच, कर्मचारी को मिली क्लीन चिट

शुक्रवार देर रात बंगाल पुलिस की SIT टीम धनबाद पहुंची और पाथरडीह थाने में लंबी पूछताछ के बाद सीधे विभाष भट्टाचार्य के घर गई। वहां बाइक की पहचान और दस्तावेजों की जांच की गई।

कर्मचारी ने स्पष्ट किया कि घटना के समय वह अपने कार्यालय में ड्यूटी पर मौजूद थे। इसके समर्थन में सीसीटीवी फुटेज भी जांच टीम को उपलब्ध कराए गए, जिससे उनका दावा सही साबित हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि अपराधियों ने उनकी बाइक का नंबर प्लेट हटाकर दूसरी बाइक (अलग रंग और मॉडल) पर लगा दिया था।

इस आधार पर विभाष भट्टाचार्य को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी गई है।

SIT अब असली आरोपियों की तलाश में, राजनीतिक एंगल की भी जांच

अब SIT ने अपनी जांच का फोकस असली हमलावरों और पूरी साजिश की कड़ियों पर केंद्रित कर दिया है। शुरुआती जांच में राजनीतिक साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया है।

इस बीच यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इतनी योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या के पीछे कौन लोग शामिल हैं और बाइक नंबर बदलकर कैसे अपराध को अंजाम दिया गया।

अब तक 3 लोग हिरासत में, लेकिन गिरफ्तारी नहीं

पुलिस ने जानकारी दी है कि इस मामले में अब तक तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे लगातार पूछताछ चल रही है। हालांकि अभी तक किसी की औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है।

जांचकर्ताओं का मानना है कि हमलावरों ने पूरी योजना के साथ इस वारदात को अंजाम दिया था। संदेह है कि अपराधी बाहर से लाई गई बाइक का इस्तेमाल कर रहे थे और उन्हें पहले से यह पता था कि निशाना किस वाहन में बैठा है।

एक वरिष्ठ SIT अधिकारी के अनुसार, “हमलावरों को पूरी जानकारी थी कि वाहन में व्यक्ति कहां बैठा है। हमला बेहद तेज, सटीक और प्रोफेशनल तरीके से किया गया था।”