तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पार्टी के भीतर ही असंतोष का सामना करना पड़ा है। कालीघाट स्थित आवास पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कई विधायकों ने नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि करीब 80 में से 15 विधायक विभिन्न कारणों से इस बैठक में शामिल नहीं हो सके, जबकि मौजूद सदस्यों के बीच तीखी बहस जैसी स्थिति बन गई।
बैठक में सामने आया असंतोष, वरिष्ठ विधायकों ने उठाए सवालसूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान कम से कम तीन वरिष्ठ विधायकों ने पार्टी के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया को लेकर असहमति जाहिर की। इन विधायकों ने संगठन में बढ़ते असंतोष और जमीनी स्तर पर कमजोर होती पकड़ को लेकर चिंता व्यक्त की। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इन नेताओं ने जताई नाराजगीरिपोर्ट्स के मुताबिक, कुणाल घोष, रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अहम फैसले बिना व्यापक चर्चा के लिए जा रहे हैं, जिससे पार्टी को चुनावी स्तर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी दौरान सांसद अभिषेक बनर्जी की भूमिका और निर्णयों को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया।
अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर उठे सवालसूत्रों का दावा है कि बैठक में कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी के कुछ फैसले पार्टी पर थोपे गए, जिसका असर संगठन की एकता और प्रदर्शन पर पड़ा है। साथ ही फालता क्षेत्र से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम और जहांगीर खान के नामांकन वापसी जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए। इस दौरान माहौल काफी गंभीर हो गया।
ममता बनर्जी की चुप्पी और बैठक का माहौलरिपोर्ट्स के अनुसार, जब यह नाराजगी सामने आई तो ममता बनर्जी अधिकांश समय चुप रहीं और पूरी बात ध्यान से सुनती रहीं। बताया गया कि बैठक के दौरान उनके चेहरे के भाव गंभीर थे, लेकिन उन्होंने किसी भी बयान पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी। इससे पहले उन्होंने यह भी दावा किया था कि आने वाले समय में भाजपा केंद्र की राजनीति में कमजोर होगी।
पार्टी के भीतर बढ़ती बहस, सड़कों पर उतरने की मांगएक सूत्र ने अखबार से बातचीत में बताया कि बैठक में कुणाल घोष ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब सिर्फ बैठकों से काम नहीं चलेगा और पार्टी को जमीनी स्तर पर सक्रिय होना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कालीघाट में लगातार बैठकों के बजाय अब सड़कों पर उतरकर जनता के बीच जाना चाहिए, ताकि भाजपा की राजनीतिक बढ़त का मुकाबला किया जा सके।
चुनावी नतीजों के बाद बढ़ी अंदरूनी बेचैनी2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हार का सामना करना पड़ा था, हालांकि तब टीएमसी ने 200 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाए रखी थी। लेकिन हाल के राजनीतिक समीकरणों में पार्टी को और झटका लगा बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2026 के हालात में न सिर्फ संगठन कमजोर दिखा बल्कि कई सीटों पर पार्टी को हार का सामना भी करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन परिणामों ने पार्टी के भीतर असंतोष को और बढ़ा दिया है।