ममता बनर्जी के कोर्ट जाने पर विवाद तेज, पूर्व CJI जस्टिस काटजू की टिप्पणी से बढ़ा राजनीतिक घमासान

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया कलकत्ता हाईकोर्ट दौरे ने राजनीतिक और कानूनी दोनों ही हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उनके वकील के काले कोट में अदालत पहुंचने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी अदालत का सहारा केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए ले रही हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस तरह की गतिविधियां बढ़ गई हैं। दूसरी ओर, भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) ने भी इस मामले में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख से स्पष्टीकरण मांग लिया है।

जस्टिस काटजू का बयान, राजनीतिक तंज से मचा हंगामा


जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए कहा कि ममता बनर्जी हाईकोर्ट इसलिए पहुंचीं क्योंकि वह चुनाव हार चुकी हैं और विधानसभा में अपनी बात रखने का मंच उनके पास नहीं बचा है। उनके अनुसार, ऐसे में उन्हें एक ऐसा मंच चाहिए जहां वे अपनी बात रख सकें और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर सकें, इसलिए उन्होंने अदालत का रास्ता चुना। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने इस बार सीमा पार कर दी है।

काले कोट में कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, मामला चर्चा में

गुरुवार को ममता बनर्जी वकील का गाउन पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं, जहां उन्होंने चुनाव के बाद कथित हिंसा और पार्टी कार्यालयों पर हमलों को लेकर अपनी दलील रखी। उन्होंने अदालत के बाहर बयान देते हुए कहा कि बंगाल कोई ‘बुलडोजर राज्य’ नहीं है। इसी दौरान अदालत परिसर से बाहर निकलते समय उनके खिलाफ नारेबाजी भी देखने को मिली। यह मामला मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया।

इस दौरान उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे। यह पूरा मामला टीएमसी की ओर से दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसे अधिवक्ता शीर्षन्या बंद्योपाध्याय ने दाखिल किया है। याचिका में 2026 विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमलों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा के आरोप लगाए गए हैं।
BCI की सख्ती, 48 घंटे में मांगी रिपोर्ट

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी कड़ा रुख अपनाया है और पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी के वकालत से जुड़े रिकॉर्ड पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। परिषद ने 48 घंटे के भीतर जानकारी देने को कहा है।

BCI का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को, जो संवैधानिक पद पर रहा हो या लाभकारी पद पर कार्यरत हो, उसे नियमों के अनुसार अपने बार लाइसेंस की स्थिति स्पष्ट करनी होती है और आवश्यक होने पर उसे निलंबित भी कराया जाता है। बाद में वकालत दोबारा शुरू करने के लिए उसे पुनः सक्रिय कराना पड़ता है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ममता बनर्जी ने वर्ष 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। ऐसे में उनके बार रजिस्ट्रेशन, वकालत की स्थिति, निलंबन और पुनः सक्रियकरण से जुड़ी सभी जानकारियां रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापित करने की आवश्यकता है। BCI ने यह भी निर्देश दिया है कि उनकी रजिस्ट्रेशन संख्या और राज्य बार काउंसिल में नामांकन की तारीख भी उपलब्ध कराई जाए।