ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि हालिया संघर्षविराम की कोशिशें भी कमजोर पड़ सकती हैं। बीती रात ईरान की ओर से इजरायल पर कई मिसाइलें दागे जाने के दावों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में चिंता बढ़ गई है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि देर रात बड़ी संख्या में मिसाइलें उनकी ओर दागी गईं, जिनमें से कई को वेस्ट बैंक के ऊपर आसमान में भी देखा गया। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में शांति बहाली की संभावनाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रंप की सख्त चेतावनी, सीजफायर पर मंडराया संकटमिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने ईरान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि हमले जारी रहे तो संघर्षविराम को लेकर चल रही कोशिशों पर गंभीर असर पड़ सकता है। ट्रंप का कहना है कि मौजूदा स्थिति को और भड़काने के बजाय सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। वहीं इजरायल ने भी संकेत दिया है कि वह इस हमले का जवाब देने के लिए तैयार है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बेरूत में कार्रवाई के बाद बढ़ा टकरावदरअसल, ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका था कि यदि लेबनान में उसके सहयोगी समूहों को निशाना बनाया गया तो वह प्रतिक्रिया देगा। रविवार को इजरायली सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमले किए, जिनका लक्ष्य हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों को बताया गया। इसके कुछ ही समय बाद ईरान की ओर से मिसाइल हमलों की खबरें सामने आईं, जिन्हें कई विश्लेषक जवाबी कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
संघर्षविराम के बाद पहला बड़ा हमला होने का दावाइजरायल का कहना है कि अप्रैल की शुरुआत में लागू हुए नाजुक संघर्षविराम के बाद यह पहली बार है जब ईरान की ओर से इस तरह का सीधा हमला किया गया है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह उस समझौते के लिए बड़ा झटका माना जाएगा, जिसे कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने युद्ध रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ताजा घटनाक्रम के बाद मध्यस्थता की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है। पहले से चल रही बातचीत पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हिजबुल्लाह पर हमले को बताया कार्रवाई की वजहतेहरान की ओर से पहले ही संकेत दिए गए थे कि बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। इजरायल ने अपने हवाई हमलों का बचाव करते हुए कहा कि उसने यह कदम उत्तरी इजरायल में हुई गोलीबारी के जवाब में उठाया था। इजरायली पक्ष का दावा है कि यह गोलीबारी ईरान समर्थित हिजबुल्लाह से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा थी।
यही वजह है कि दोनों पक्ष अपने-अपने कदमों को जवाबी कार्रवाई के तौर पर पेश कर रहे हैं, जिससे हालात और उलझते नजर आ रहे हैं।
संघर्षविराम को लेकर भी बढ़ी अनिश्चिततागौरतलब है कि कुछ ही दिनों पहले अमेरिका की मध्यस्थता में लेबनान और इजरायल के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत हुई थी और संघर्षविराम पर सहमति बनने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि हिजबुल्लाह ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया था और उसके बाद से स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई।
ताजा घटनाक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करना अभी भी आसान नहीं होगा। लगातार बदलते हालात के बीच किसी भी छोटी सैन्य कार्रवाई के बड़े संघर्ष में बदलने का खतरा बना हुआ है।
लेबनान में हमले के बाद बढ़ी चिंतालेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बेरूत में एक आवासीय इमारत को निशाना बनाकर किए गए हमले में दो लोगों की मौत हुई है, जबकि लगभग 20 अन्य घायल हुए हैं। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में किया जा रहा है।
इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर अस्थिरता का माहौल बन गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने की अपील कर रहा है, लेकिन जमीनी हालात फिलहाल किसी बड़े समाधान की बजाय बढ़ते टकराव की ओर इशारा करते दिखाई दे रहे हैं।