पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद खड़ा कर दिया है। वायरल वीडियो में उन्हें एक मुस्लिम धार्मिक मंच से संबोधित करते हुए कथित तौर पर सनातन धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते सुना जा सकता है। बताया जा रहा है कि अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा, “जानबूझकर एक ‘गंदा धर्म’ जो इस जुमला पार्टी ने बनाया, उसे हम स्वीकार नहीं करते हैं।” इस बयान के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
सिलीगुड़ी साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुई शिकायतइस कथित बयान को लेकर सिलीगुड़ी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच में वकील रिंकी चटर्जी सिंह द्वारा दाखिल की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ममता बनर्जी ने अपने बयान के जरिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की गई है।
सनातन धर्म को लेकर टिप्पणी पर आपत्तिशिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी का कहना है कि चुनावी और सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के बयान सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं। उनके अनुसार, ममता बनर्जी ने कथित तौर पर एक धार्मिक सभा के दौरान सनातन धर्म के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऐसे बयान सामाजिक तनाव बढ़ाने का कारण बन सकते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ममता बनर्जी एक मुस्लिम मंच पर मौजूद दिखाई देती हैं, जहां उनके आसपास कई लोग खड़े नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनके कथित बयान के दौरान मंच पर मौजूद लोग सिर हिलाकर सहमति जताते दिखते हैं। हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि उसी मंच पर एक पुलिस अधिकारी की मौजूदगी भी देखी गई, जो पूरे घटनाक्रम के दौरान वहीं खड़े नजर आते हैं। वीडियो में किसी भी तरफ से तत्काल विरोध या आपत्ति दर्ज होती नहीं दिखाई देती।
FIR की मांग और बढ़ता विवादइस पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के बयान धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले हैं और इन पर सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है। चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बाद इस मुद्दे ने और भी ज्यादा राजनीतिक रंग ले लिया है, जिससे राज्य में बहस तेज हो गई है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और कानूनी जांच की मांग के बीच लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।