पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता जहांगीर खान से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। फलता थाना पर कथित हमले की साजिश और गिरफ्तार नेता को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश के आरोपों के बीच पुलिस ने शनिवार सुबह उनकी पत्नी जरीना बीबी को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियों का दावा है कि जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद भड़के विरोध प्रदर्शनों के पीछे जरीना बीबी की महत्वपूर्ण भूमिका थी और उन्होंने ही समर्थकों को संगठित करने में सक्रिय भागीदारी निभाई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, खुफिया रिपोर्ट और अब तक की जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि जरीना बीबी ने कथित तौर पर समर्थकों को उकसाने और उन्हें थाने तक पहुंचाने की रणनीति तैयार करने में भूमिका निभाई। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार टीएमसी नेता जहांगीर खान, जो खुद को अक्सर 'पुष्पा' कहकर संबोधित करते थे, की गिरफ्तारी के बाद माहौल को भड़काने की कोशिश की गई थी।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले जहांगीर खान को जबरन वसूली समेत कई गंभीर आरोपों के तहत भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई और मंगलवार को फलता के शतोल कोलसा इलाके में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रशासन को आशंका थी कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
जांच एजेंसियों को मिली सूचनाओं के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों की योजना केवल विरोध जताने तक सीमित नहीं थी। आरोप है कि भीड़ के एक हिस्से ने फलता पुलिस स्टेशन तक पहुंचकर वहां दबाव बनाने और जहांगीर खान को हिरासत से छुड़ाने की कोशिश की रणनीति बनाई थी। हालांकि समय रहते पुलिस को इसकी भनक लग गई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया।
संभावित हिंसा को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी तैनाती की गई थी। प्रशासन की सतर्कता के कारण कथित योजना सफल नहीं हो सकी और स्थिति को नियंत्रण में रखा गया। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की और कई संदिग्धों की पहचान की।
अब तक इस मामले में आठ से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जरीना बीबी की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इसी एफआईआर के आधार पर शनिवार सुबह उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया।
उधर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने लोगों से संयम बरतने और कानून को अपने हाथ में न लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ जनता की नाराजगी स्वाभाविक हो सकती है, लेकिन किसी भी स्थिति में कानून व्यवस्था को चुनौती देना उचित नहीं है।
मीडिया से बातचीत करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार और जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी व्यक्ति के घर या निजी संपत्ति पर जाकर विरोध न करें और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखें। उनके अनुसार, दोषियों को सजा दिलाने का काम अदालत और जांच एजेंसियों का है, न कि भीड़ का।
उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का शासन स्थापित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसी उद्देश्य से प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि भ्रष्टाचार या आपराधिक गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
शुभेंदु अधिकारी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब हावड़ा जिले के बागनान क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। हाल ही में भाजपा समर्थक प्रशांत डे की हत्या के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। यह विवाद कथित भ्रष्टाचार के आरोपों और स्थानीय पंचायत प्रशासन के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश से जुड़ा बताया जा रहा है।
अधिकारी ने इस मामले का जिक्र करते हुए कहा कि संबंधित ग्राम पंचायत के उप-प्रधान सहित कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और जांच जारी है। उन्होंने दोहराया कि किसी भी घटना की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल जरीना बीबी की गिरफ्तारी के बाद जहांगीर खान प्रकरण ने एक नया मोड़ ले लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा विरोध प्रदर्शन को संगठित करने में किन व्यक्तियों ने पर्दे के पीछे भूमिका निभाई।