जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश? पत्नी की अगुवाई में जुटी भीड़, पुलिस पहुंचते ही मची भगदड़

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फलता इलाके में मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेता जहांगीर खान उर्फ पुष्पा की गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य खान की रिहाई की मांग को लेकर दबाव बनाना था, लेकिन हालात जल्द ही नियंत्रण से बाहर होने लगे। इसके बाद पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को मोर्चा संभालना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल लोगों की अगुवाई कथित तौर पर जहांगीर खान की पत्नी कर रही थीं। देखते ही देखते बड़ी संख्या में समर्थक एकत्र हो गए और इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रशासन को आशंका थी कि भीड़ स्थानीय पुलिस थाने की ओर बढ़ सकती है, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।

सड़क पर उतरे समर्थक, बढ़ी प्रशासन की चिंता

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ रही थी। इसी के चलते फलता के शातोल कालसा क्षेत्र में लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह विरोध प्रदर्शन बड़े समूह में बदल गया और कई लोग नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने लगे।

खबर है कि प्रदर्शनकारियों की योजना पुलिस स्टेशन की ओर मार्च निकालने की थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को पहले ही सतर्क कर दिया गया था। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा कर्मियों को इलाके में तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

केंद्रीय बलों के पहुंचते ही मचा भगदड़ जैसा माहौल

जैसे ही केंद्रीय बलों और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। अधिकारियों ने पहले लोगों को हटने की चेतावनी दी, लेकिन भीड़ के पीछे नहीं हटने पर बल प्रयोग करना पड़ा।

रिपोर्टों के अनुसार, हालात को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज भी किया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। घटनास्थल से सामने आए कथित वीडियो में भी बड़ी संख्या में लोगों को भागते हुए देखा जा सकता है, जबकि सुरक्षा बल उन्हें पीछे हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
तालाब में कूदकर बचने की कोशिश

घटना के दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। बताया जा रहा है कि जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को खदेड़ना शुरू किया तो कुछ लोग पास के तालाबों की ओर भाग गए और खुद को बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई प्रदर्शनकारी लंबे समय तक तालाब में ही छिपे रहे ताकि पुलिस की नजर से बच सकें। इस दृश्य ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया और घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे।

नेपाल सीमा के पास हुई थी जहांगीर खान की गिरफ्तारी

जहांगीर खान को हाल ही में भारत-नेपाल सीमा के नजदीक से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें लेकर राज्य की राजनीति में भी काफी चर्चा हुई थी।

बीते दिनों पुलिस ने उन्हें फलता क्षेत्र की सड़कों पर लेकर भी गई थी। उस दौरान सामने आए वीडियो में देखा गया था कि उनकी कमर में रस्सी बंधी हुई थी और वह लोगों के बीच चलते हुए दिखाई दे रहे थे। वीडियो में यह भी नजर आया था कि वह कान पकड़कर माफी मांगते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

चुनाव से अचानक हटने पर भी मचा था राजनीतिक विवाद

जहांगीर खान का नाम उस समय भी चर्चा में आया था जब उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान अचानक चुनावी मैदान छोड़ने का फैसला किया था। उन्होंने फलता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन 21 मई को हुए पुनर्मतदान से पहले ही उन्होंने खुद को चुनावी प्रक्रिया से अलग करने की घोषणा कर दी थी।

उनके इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। तृणमूल कांग्रेस ने उनके कदम को विश्वासघात बताया था, जबकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधा था। इसके अलावा पार्टी के भीतर भी इस बात को लेकर सवाल उठे थे कि खान के खिलाफ समय रहते कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

विकास के वादों का दिया था हवाला

चुनाव से हटने की घोषणा करते समय जहांगीर खान ने कहा था कि उन्होंने यह फैसला क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने दावा किया था कि इलाके के लिए विशेष विकास योजनाओं और आर्थिक पैकेज के आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने चुनावी दौड़ से खुद को अलग करने का निर्णय लिया।

हालांकि उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक बहस छिड़ गई थी। समर्थकों और विरोधियों ने अपने-अपने तरीके से इसकी व्याख्या की। अब गिरफ्तारी, विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद एक बार फिर जहांगीर खान का नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा के केंद्र में आ गया है। प्रशासन फिलहाल पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और स्थिति को पूरी तरह सामान्य बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।