सीमा पर सख्ती का दौर शुरू! शुभेंदु के फैसले के बाद फेंसिंग कार्य तेज, स्थानीय बोले- पहले डरावना था माहौल

सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े क्षेत्रों में फेंसिंग का कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को लगभग 27 किलोमीटर भूमि हस्तांतरित किए जाने के बाद सिलीगुड़ी सब-डिवीजन के फांसीदेवा इलाके में बाड़ लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इस पहल को सीमा प्रबंधन और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। काम शुरू होते ही स्थानीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं और कई लोगों ने इसे राहत देने वाला निर्णय बताया है।

जमीनी स्तर पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और सीमा क्षेत्र में मशीनों व श्रमिकों की मदद से बाड़ लगाने का कार्य जारी है। लंबे समय से अटके भूमि हस्तांतरण के बाद अब प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत काम को गति दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इस इलाके में सुरक्षा को लेकर कई तरह की चिंताएं बनी रहती थीं और माहौल अस्थिरता जैसा महसूस होता था। कुछ निवासियों ने बताया कि पहले सामान्य जीवन में भी असुरक्षा की भावना रहती थी, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं और लोगों में भरोसा बढ़ा है।

स्थानीय निवासियों ने जताई राहत

फांसीदेवा क्षेत्र के निवासी अनिल घोष ने कहा कि यह इलाका लंबे समय तक सीमावर्ती असुरक्षा की स्थिति से प्रभावित रहा है। उनके अनुसार पहले यहां सुरक्षा व्यवस्थाएं कमजोर थीं, जिसके कारण लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने यह भी कहा कि पहले दैनिक जीवन में भी डर जैसा माहौल महसूस होता था, लेकिन अब स्थिति में सुधार दिख रहा है और लोगों को सुरक्षा का अहसास हो रहा है। उनके मुताबिक नई व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता से गांवों में विश्वास बढ़ा है।

एक अन्य स्थानीय निवासी नारायण साहा ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि सीमा पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन पहले इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई थी। उन्होंने बताया कि अब फेंसिंग का काम शुरू होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है और वे खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे थे और अब जाकर स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा है।

सुरक्षा और विकास को लेकर उम्मीदें बढ़ीं

ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना के शुरू होने से न केवल सीमा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में सामान्य जीवन भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। लोगों में यह भावना है कि अब लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता कम होगी और दैनिक जीवन में स्थिरता आएगी। कई निवासियों ने इसे सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा है और कहा है कि इससे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बनेगा।
सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में संतोष

स्थानीय निवासी शिवम मोदक ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बताया और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन हस्तांतरित किए जाने के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत होगी और लोगों में भरोसा बढ़ेगा। उनके अनुसार, “यह हमारे लिए बेहद राहत की बात है कि सरकार ने बीएसएफ को 27 किलोमीटर भूमि उपलब्ध कराई है। इससे हमें लंबे समय से बनी असुरक्षा की भावना से कुछ हद तक राहत मिली है। पहले यहां आपसी तनाव और अनिश्चित माहौल के कारण लोग खुद को असुरक्षित महसूस करते थे, क्योंकि किसी भी समय कुछ भी अप्रिय घटना हो सकती थी। यह पूरी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। हमने कई बार इस दिशा में मांग उठाई थी, लेकिन पहले की सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी।”

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीमा पर फेंसिंग के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं किया गया, जिससे सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्य प्रभावित हुए। उनका कहना था कि यदि समय पर जमीन मिल जाती, तो सुरक्षा ढांचे को पहले ही मजबूत किया जा सकता था।

उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान प्रक्रिया सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के बाद शुरू हुई है, जिसके तहत भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। अधिकारियों के अनुसार, तय समय सीमा के भीतर लगभग 45 दिनों में यह जमीन गृह मंत्रालय को सौंप दी जाएगी, जिसके बाद सीमा सुरक्षा बल द्वारा फेंसिंग का कार्य पूरा किया जाएगा।