ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आरोपी पति समर्थ सिंह जबलपुर कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंचा, लेकिन कोर्ट परिसर में पहुंचते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब 10 दिनों से फरार चल रहा था। उसके वकील सौरभ सुंदर ने जानकारी दी कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सरेंडर से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया जा रहा है।
12 मई को ट्विशा की मौत के बाद से ही समर्थ सिंह पुलिस की पकड़ से बाहर था। इस मामले में मृतका के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी बेटी की हत्या में पति और सास दोनों की भूमिका हो सकती है। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पहले 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया ताकि उसकी तलाश तेज की जा सके।
डेटिंग ऐप से शुरू हुई थी दोनों की कहानीजानकारी के अनुसार नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की मुलाकात वर्ष 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए समर्थ सिंह से हुई थी। दोनों के बीच संबंध आगे बढ़े और दिसंबर 2025 में उन्होंने विवाह कर लिया। शादी के बाद ट्विशा भोपाल स्थित अपने ससुराल कटारा हिल्स के बाघ मुगालिया एक्सटेंशन इलाके में रहने लगी, जहां वह पति और ससुराल पक्ष के साथ रह रही थी।
परिजनों का दावा है कि शादी के बाद से ही ट्विशा मानसिक रूप से खुश नहीं थी और वह कई बार नोएडा वापस लौटने की इच्छा जता चुकी थी। परिवार का कहना है कि वह लगातार उनसे संपर्क में थी और घटना से कुछ समय पहले तक भी बातचीत कर रही थी। पिता के अनुसार, मौत से लगभग 30 मिनट पहले उनकी बेटी ने फोन पर बताया था कि उसे पति और सास द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है और उसके साथ मारपीट भी की गई है।
हाईकोर्ट के आदेश और जांच में बड़ा मोड़इस बीच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले में अहम निर्देश जारी करते हुए ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट के आदेश के अनुसार दिल्ली एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भोपाल आकर दोबारा पोस्टमॉर्टम करेगी। साथ ही शव को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 80 डिग्री तापमान में संरक्षित करने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार से सबूत प्रभावित न हों।
इसके अलावा अदालत ने आरोपी सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर भी नोटिस जारी किया है और सोमवार को सुनवाई तय की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से भी जल्द सुनवाई की मांग की गई है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता बताई।
CBI जांच की सिफारिश भी आगे बढ़ीइसी बीच मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है। अब इस हाई-प्रोफाइल केस में पुलिस जांच के साथ-साथ न्यायिक और केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी भी तेज हो गई है, जिससे आगे की कार्रवाई पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।