पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 20 लाख कर्मचारियों को 25% DA तुरंत देने का आदेश

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा महंगाई भत्ते (DA) का विवाद सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। गुरुवार को उच्चतम न्यायालय ने राज्य के करीब 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी और सरकार को निर्देश दिया कि 2008 से 2019 तक का बकाया DA कर्मचारियों को भुगतान किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछले अंतरिम आदेश के अनुसार कम से कम 25% बकाया राशि को 6 मार्च तक जारी किया जाना अनिवार्य है।

बकाया DA भुगतान के लिए समिति का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बाकी 75% बकाया DA के निपटारे के लिए चार सदस्यों की एक समिति का गठन किया जाए। इस समिति में पूर्व SC न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा और दो रिटायर्ड HC चीफ जस्टिस के साथ-साथ CAG या CAG द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि DA कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है और यह ROPA नियमों के तहत मूल वेतन की गणना में शामिल होता है। समिति का काम होगा कि बंगाल राज्य के कर्मचारियों के बकाया DA भुगतान का वित्तीय आकलन कर इसका निर्धारण करे।

तीन महीने के भीतर भुगतान का आदेश और सरकार की अपील

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इससे पहले, 16 मई को पारित एक अंतरिम आदेश में अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर कर्मचारियों को कम से कम 25% DA का भुगतान किया जाए। ममता बनर्जी सरकार ने बाद में फंड की कमी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस डेडलाइन को छह महीने बढ़ाने की अपील की थी।

महंगाई भत्ते का वर्तमान स्तर और अंतर

1 अप्रैल 2025 से बंगाल सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते को पिछले बजट में मूल वेतन का 18% तय किया था। जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिए जाने वाले DA और राज्य कर्मचारियों के बीच यह अंतर लगभग 40% है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न केवल कर्मचारियों के अधिकारों को सुनिश्चित करता है, बल्कि राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन और DA वितरण की पारदर्शिता को भी मजबूती देगा।