पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलाव के बाद नई सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में लगातार बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, जिनका असर अब पुलिस और जेल विभाग तक साफ दिखाई दे रहा है। हाल ही में सामने आई कानून-व्यवस्था से जुड़ी खामियों और जेल सुरक्षा में गंभीर लापरवाही के मामलों ने सरकार को कड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल मामले को लेकर भी राज्य में सियासी तापमान बढ़ा हुआ है और जांच प्रक्रिया फिर से तेज हो गई है। इसी बीच सरकार की ओर से की गई ताजा कार्रवाई ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में लापरवाही और मामले को सही ढंग से हैंडल न करने के आरोप में कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त समेत तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों पर गाज गिरी है। इन सभी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। सरकार का साफ संदेश है कि संवेदनशील मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस कार्रवाई को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “अभया” मामले में न्याय प्रक्रिया को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की और अनियमितता में शामिल रहे।
निलंबित किए गए अधिकारियों में पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डीसीपी इंदिरा मुखर्जी और अधिकारी अभिषेक गुप्ता के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इन सभी पर विभागीय जांच के दौरान गंभीर लापरवाही और गलत आचरण के आरोप सामने आए हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में भी खलबली मच गई है और कई स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
दूसरी ओर जेल विभाग से जुड़ा एक और बड़ा मामला भी सामने आया है, जिस पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रेसीडेंसी जेल में कैदियों द्वारा मोबाइल फोन के खुलेआम इस्तेमाल की शिकायतों के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि कुछ हाई-प्रोफाइल कैदी जेल के अंदर रहते हुए भी स्मार्टफोन के जरिए बाहरी नेटवर्क से संपर्क बनाए हुए थे। इस स्थिति ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए सीधे सवाल उठाया कि आखिर जेल जैसी उच्च सुरक्षा वाली जगह पर मोबाइल फोन कैदियों तक कैसे पहुंच रहे हैं और वे उनका इस्तेमाल कैसे कर पा रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रेसीडेंसी जेल के सुपरिंटेंडेंट और चीफ कंट्रोलर को निलंबित कर दिया है।
सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करते हुए जेल परिसर में मोबाइल और नेटवर्क उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। दोपहर 2 बजे से ही यह नियम लागू कर दिया गया है। साथ ही मुख्य सचिव को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी जेल सुरक्षा दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य के जेल प्रशासन में बड़े सुधार की संभावना जताई जा रही है।