विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि मेडिकल परीक्षण में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, इस संवेदनशील मामले पर पुलिस अधिकारी और चिकित्सक आधिकारिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं। जांच अधिकारी अब इस मेडिकल रिपोर्ट को केस डायरी में शामिल कर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुट गए हैं।
सीएचसी से बेली अस्पताल तक की प्रक्रियाबुधवार को झूंसी पुलिस दोनों नाबालिगों को पहले सरायइनायत स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर गई थी। वहां चिकित्सकों ने बच्चों की उम्र को देखते हुए विस्तृत परीक्षण के लिए उन्हें बेली अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद दोनों का विधिवत मेडिकल परीक्षण कराया गया।
अस्पताल और पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक निष्कर्ष बच्चों के आरोपों की पुष्टि की ओर इशारा करते हैं। फिर भी, आधिकारिक बयान न आने तक रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
अदालत में दर्ज हुए बयानमेडिकल से पहले बच्चों को अदालत में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए गए थे। न्यायालय के समक्ष दोनों नाबालिगों ने कथित यौन उत्पीड़न की घटना का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने मुकुंदानंद समेत अन्य लोगों के नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए।
कलमबंद बयान दर्ज होने के बाद अब पुलिस साक्ष्यों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अदालत में दिए गए बयानों को भी विवेचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने की कवायद तेजपुलिस ने पहले ही दोनों पीड़ितों के बयान दर्ज किए थे, जिसके बाद मेडिकल परीक्षण कराया गया। अब रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से केस फाइल में संलग्न किया जा रहा है। साथ ही आरोपितों से जुड़े अन्य साक्ष्यों के संकलन की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद के अलावा तीन अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर जोर दे रही है, ताकि जांच किसी भी स्तर पर कमजोर न पड़े।
कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुआ मामलायह मुकदमा झूंसी थाने में न्यायालय के आदेश पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रम्हचारी, जो मथुरा-वृंदावन निवासी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष बताए जाते हैं, की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला कायम किया।
आरोप है कि महाकुंभ और माघ मेले के दौरान नाबालिग लड़कों के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। मामले में धमकी और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। केस पंजीकृत होने के बाद पुलिस लगातार जांच को आगे बढ़ा रही है।
कोर्ट में बच्चों ने सुनाई आपबीतीवादी आशुतोष ब्रम्हचारी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि अदालत में बयान देते समय दोनों बच्चे भावुक हो गए थे और रोते हुए उन्होंने पूरी घटना का जिक्र किया। उनके अनुसार, बच्चों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सहित कई अन्य लोगों के नाम लिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल रिपोर्ट बच्चों के आरोपों की पुष्टि करती है। हालांकि अंतिम स्थिति आधिकारिक पुष्टि और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल, यह मामला संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ जांच के दायरे में है।