प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे। अबू धाबी में उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक सहयोग जैसे अहम क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी।
द्विपक्षीय वार्ता से पहले दिए गए अपने शुरुआती संबोधन में पीएम मोदी ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि भारत हर हाल में यूएई के साथ खड़ा है और हालिया हमलों की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे जल्द से जल्द खुला और निर्बाध बनाए रखना केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक हित में भी आवश्यक है। पीएम मोदी ने यह भी दोहराया कि भारत हमेशा शांति और संवाद का पक्षधर रहा है। उल्लेखनीय है कि यूएई हवाई क्षेत्र में प्रवेश के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री के विमान को वहां के F-16 लड़ाकू विमानों द्वारा एस्कॉर्ट किया गया, जबकि अबू धाबी पहुंचने पर उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया।
भारत-यूएई के बीच कई रणनीतिक समझौते, सहयोग को मिली नई दिशाइस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए कई अहम समझौते हुए। प्रमुख घोषणाएं इस प्रकार रहीं—
भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी (Strategic Defence Partnership) के फ्रेमवर्क पर सहमति बनी
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए
एलपीजी (LPG) आपूर्ति को लेकर दीर्घकालिक सहयोग पर समझौता हुआ
गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने के लिए MoU साइन किया गया
भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा हुई
इन समझौतों को भारत और यूएई के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।
भारत-यूएई संबंध: व्यापार, निवेश और प्रवासी समुदाय की मजबूत कड़ीभारत और यूएई के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि गहरे आर्थिक और सामाजिक आधार पर भी टिके हुए हैं। यूएई आज भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार है, जबकि पिछले 25 वर्षों में यह भारत में निवेश के प्रमुख स्रोतों में सातवें स्थान पर रहा है।
यूएई में करीब 45 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो वहां विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ये प्रवासी न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, बल्कि भारत में भी बड़ी मात्रा में धन प्रेषण (remittance) भेजते हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। दोनों देशों के बीच यह मानवीय और आर्थिक जुड़ाव संबंधों को और गहरा बनाता है।
पांच देशों की यात्रा पर पीएम मोदी, वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने का लक्ष्यगौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई से 20 मई तक पांच देशों की विदेश यात्रा पर हैं। इस दौरे का पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात रहा, जिसके बाद वे नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे।
इस विदेश यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, नवाचार और हरित विकास जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना है। साथ ही यह दौरा यूरोप और खाड़ी देशों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।