सावन की भीड़ ने ली जान: यूपी और उत्तराखंड में मंदिरों पर मची भगदड़, करंट व अफवाह से 10 की मौत, 70 से अधिक घायल

सावन सोमवार की धार्मिक आस्था उस वक्त मातम में बदल गई जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों में एक ही दिन के भीतर भगदड़ जैसी घटनाएं सामने आईं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले और उत्तराखंड के हरिद्वार में सोमवार तड़के और रविवार को हुई अलग-अलग घटनाओं में कुल 10 लोगों की जान चली गई और दर्जनों श्रद्धालु घायल हो गए। दोनों ही घटनाओं में बिजली से जुड़ी वजहों ने भय का माहौल पैदा किया और देखते ही देखते भारी भीड़ में भगदड़ मच गई।

बाराबंकी में टिन शेड पर गिरे तार ने मचाई तबाही


उत्तर प्रदेश के बाराबंकी स्थित अवसानेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार तड़के जलाभिषेक के लिए उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक पुराना बिजली का तार ऊपर से टूटकर टिन शेड पर आ गिरा। यह हादसा तड़के करीब 3 बजे हुआ जब लोग मंदिर में जल चढ़ाने के लिए कतार में खड़े थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक बंदर ऊपर से गुजरते बिजली के तार पर कूद गया, जिससे वह तार टूट गया और टिन की छत पर गिर गया। धातु की छत में तुरंत करंट फैल गया, जिससे वहां खड़े कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए। इस कारण मची भगदड़ में दो लोगों की मौत हो गई और करीब 40 लोग घायल हो गए।

मरने वालों में एक की पहचान, दूसरे की तलाश जारी

मृतकों में एक की पहचान लोनीकटरा थाना क्षेत्र के मुबारकपुरा गांव निवासी 22 वर्षीय प्रशांत के रूप में हुई है। दोनों मृतकों की इलाज के दौरान त्रिवेदीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मौत हुई। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्रशासन ने माना बंदरों की वजह से हुआ हादसा


बाराबंकी के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि यह हादसा पुराने और क्षतिग्रस्त तार पर बंदरों के कूदने से हुआ। उन्होंने कहा, “जब बंदर तार पर कूदे तो वह टूट गया और टिन शेड पर गिर गया, जिससे करंट फैल गया। इससे 19 लोगों को करंट लगा और भगदड़ जैसी स्थिति बनी। स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है।”

हरिद्वार में अफवाह से मची भगदड़, 8 की गई जान

इस हृदयविदारक घटना से एक दिन पहले रविवार को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में भगदड़ की खबर सामने आई थी। सावन के अवसर पर पहाड़ी पर स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी थी, जहां सीढ़ियों के प्रवेश द्वार के पास बिजली का करंट लगने की अफवाह फैल गई। अफवाह सुनते ही लोगों में भगदड़ मच गई, जिसमें 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग घायल हो गए।

हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मंदिर पर चढ़ाई के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। उसी बीच करंट लगने की आशंका के चलते अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए एक-दूसरे पर गिरते-पड़ते भागने लगे। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि मृतकों के परिजनों को सूचित किया जा चुका है।

मुख्यमंत्रियों की त्वरित प्रतिक्रिया


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी की घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों को तत्काल राहत और इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार घटना की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। दोनों सरकारों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की बात कही है।

भक्तिभाव में लापरवाही क्यों?

बार-बार सावन जैसे पर्वों पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की जान जाना अब आम हो चला है। कहीं बिजली के तारों की खस्ताहाली है, तो कहीं अफवाहों पर भीड़ का नियंत्रण खो बैठना चिंता का विषय बन गया है। यह घटनाएँ यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब भी जारी है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, मंदिरों में भीड़ नियंत्रण, पुराने बिजली तारों की मरम्मत और बंदरों जैसे जानवरों को नियंत्रित करने की योजना न होना इन घटनाओं का बड़ा कारण बन रहा है। प्रशासन को हर पर्व और भीड़भाड़ वाले मौकों पर न केवल सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ानी चाहिए, बल्कि पुख्ता तकनीकी इंतज़ाम भी करने चाहिए।

बाराबंकी और हरिद्वार की दो अलग-अलग घटनाओं ने सावन की आस्था को शोक में बदल दिया। यह समय है जब प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और श्रद्धालु सभी को मिलकर यह सोचने की जरूरत है कि श्रद्धा का मार्ग सुरक्षित कैसे बनाया जाए। मंदिरों को न केवल ईश्वर का स्थान माना जाता है, बल्कि वह जनसमूह के एकत्र होने की संवेदनशील जगह भी हैं — जहाँ एक छोटी सी चूक बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।