जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रविवार को शामली पहुंचे, जहां उन्होंने विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। इस दौरान अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चल रही जांच को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था का संबंध सीधे उच्च स्तर तक जाता हो, वहां से जो निर्देश आएंगे, उसी आधार पर रिपोर्ट शासन तक पहुंचेगी।
राम मंदिर ट्रस्ट में कथित गड़बड़ियों से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि यदि विभिन्न माध्यमों से लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं जो जांच की मांग करते हैं। शंकराचार्य ने कहा कि जब लोग कुछ मामलों को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, तो उन पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि सीसीटीवी व्यवस्था से छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आए हैं। इसके अलावा जो लोग आवाज उठाते हैं या सवाल पूछते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होने की बातें भी कही जा रही हैं। उनके अनुसार इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।
चंपत राय से मुलाकात न करने पर योगी सरकार की सराहनामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया अयोध्या दौरे का जिक्र करते हुए जब उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात क्यों नहीं की, तो इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्णय की प्रशंसा की।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर आरोप लगे हुए हैं, तो जांच पूरी होने तक उससे दूरी बनाए रखना एक उचित प्रशासनिक और नैतिक कदम माना जा सकता है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री का यह निर्णय सराहनीय है क्योंकि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और निष्पक्षता का संदेश भी महत्वपूर्ण होता है।
नृपेंद्र मिश्रा को लेकर भी साधा निशानाशंकराचार्य ने बातचीत के दौरान राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अतीत की कुछ घटनाओं को लेकर उनकी अपनी आपत्तियां हैं और वे उन घटनाओं को भूल नहीं सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में गौ सेवकों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर कई लोगों के मन में आज भी नाराजगी बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर जैसे धार्मिक और भावनात्मक महत्व वाले स्थान से जुड़े लोगों के चयन को लेकर भी समाज में अलग-अलग राय हो सकती है। इसी संदर्भ में उन्होंने अपनी असहमति व्यक्त करते हुए नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए।
समाजवादी पार्टी के विधायकों द्वारा राम मंदिर नहीं जाने के विषय में पूछे गए सवाल पर उन्होंने टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि यह उस पार्टी का आंतरिक विषय है और उसके बारे में बेहतर जवाब पार्टी नेतृत्व ही दे सकता है।
गौ संरक्षण को चुनावी मुद्दा बनाने की अपीलशामली प्रवास के दौरान शंकराचार्य ने गौ संरक्षण के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आने वाले चुनावों में मतदान करते समय गौ माता की सुरक्षा और सम्मान को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे जनप्रतिनिधियों और दलों को समर्थन मिलना चाहिए जो गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की दिशा में काम करने की इच्छा रखते हों।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में उनकी यात्रा लगातार जारी है और अब तक वह लगभग 225 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। उनका लक्ष्य राज्य की प्रत्येक विधानसभा तक पहुंचकर लोगों से संवाद स्थापित करना है।
78 वर्षों में गौ संरक्षण को लेकर सरकारों पर उठाए सवालअविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद बीते 78 वर्षों में कोई भी सरकार गौ माता की सुरक्षा को लेकर अपेक्षित स्तर पर काम नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि समाज को अब ऐसे नेतृत्व का चयन करना चाहिए जो इस विषय को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाए।
उन्होंने लोगों से संगठित होकर अपनी प्राथमिकताओं को राजनीतिक रूप से स्पष्ट करने की अपील की। उनके अनुसार यदि मतदाता यह संदेश देंगे कि गौ संरक्षण उनके लिए अहम मुद्दा है, तो राजनीतिक दल भी इस दिशा में अधिक सक्रियता दिखाने को मजबूर होंगे।
उन्होंने कहा कि जनता के वोट की ताकत बहुत बड़ी होती है और इसका उपयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक वर्षों से लोगों के वोट का इस्तेमाल तो हुआ, लेकिन कई मूलभूत मुद्दे अब भी अधूरे हैं। इसलिए अब मतदाताओं को अपने निर्णय में उन मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो उनके लिए महत्वपूर्ण हैं।
लोकतंत्र और हॉर्स ट्रेडिंग पर भी जताई चिंताचुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर भी शंकराचार्य ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चुनावों में होने वाली कथित गड़बड़ियां सभी मतों को प्रभावित नहीं करतीं, लेकिन थोड़े प्रतिशत की अनियमितताएं भी लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े कर सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में राजनीति में खरीद-फरोख्त और हॉर्स ट्रेडिंग जैसी चर्चाएं लगातार सुनाई देती हैं। उनके अनुसार जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के दल बदलने और राजनीतिक सौदों की बातें सामने आती हैं, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की छवि प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसी प्रवृत्तियां लगातार बढ़ती रहीं तो जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है और भविष्य में लोग नई व्यवस्थाओं की मांग करने लगेंगे। इसलिए लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए राजनीतिक शुचिता और नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आशुतोष महाराज से जुड़े विवाद पर भी दी प्रतिक्रियाशामली निवासी ब्रह्मचारी आशुतोष महाराज से जुड़े आरोपों के बारे में पूछे जाने पर शंकराचार्य ने कहा कि वह उस विषय पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि किसी भी जिले की पहचान वहां के विद्वानों, संतों और सकारात्मक कार्यों से होनी चाहिए, न कि विवादित मामलों से।
उन्होंने कहा कि शामली की अपनी एक समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां अनेक विद्वान और सम्मानित व्यक्तित्व हुए हैं, इसलिए जिले की पहचान उन्हीं सकारात्मक योगदानों के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से भी आग्रह किया कि समाज को आगे बढ़ाने वाले कार्यों और व्यक्तित्वों को अधिक महत्व दिया जाए।