बैंक खातों में जमा लाखों रुपये का हिसाब नहीं दे सके राम मंदिर चढ़ावा मामले के आरोपी, जांच में लगातार हो रहे नए खुलासे

अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई अहम तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल से संकेत मिले हैं कि चढ़ावे से रकम निकालने का कथित खेल हाल का नहीं, बल्कि काफी समय से चलता आ रहा था। जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल आरोपियों के बैंक खातों में जमा बड़ी धनराशि को लेकर खड़ा हुआ है। पूछताछ के दौरान आरोपी इस रकम के स्रोत के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। फिलहाल जांच एजेंसियों को केवल पिछले 45 दिनों का सीसीटीवी फुटेज ही उपलब्ध हो सका है, जिसके आधार पर आठ लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

चोरी की रकम का इस्तेमाल कहां किया गया?


गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की विस्तृत जांच में पुलिस को कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन मिले हैं। शुरुआती जांच से संकेत मिला है कि कथित तौर पर चोरी की गई रकम का एक हिस्सा सीधे बैंक खातों में जमा कराया गया, जबकि कुछ धनराशि का उपयोग संपत्ति खरीदने में किया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के खातों में लंबे समय से बड़ी रकम जमा होती रही, लेकिन जब उनसे इस पैसे के स्रोत के बारे में पूछा गया तो वे कोई स्पष्ट या विश्वसनीय जानकारी नहीं दे पाए। अब बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।

महाकुंभ के दौरान बढ़ा चढ़ावा, उसी के साथ बढ़ी कथित हेराफेरी

SIT की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि शुरुआती दौर में कथित तौर पर चढ़ावे से अपेक्षाकृत कम रकम निकाली जाती थी। हालांकि, प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान और उसके बाद राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई, जिससे चढ़ावे की राशि भी कई गुना बढ़ गई। इसी अवधि में कथित तौर पर बड़ी रकम की हेराफेरी शुरू होने की आशंका जताई जा रही है।

13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक चले महाकुंभ में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां से सीधे अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन करने आए। इस दौरान मंदिर में रिकॉर्ड स्तर पर चढ़ावा प्राप्त हुआ, जिससे नकदी की मात्रा भी काफी बढ़ गई।
सीसीटीवी सीमित, लेकिन बैंक रिकॉर्ड बने अहम सबूत

जांच अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध 45 दिनों के सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध दिखाई दीं। इन्हीं वीडियो के आधार पर आठ आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि कथित चोरी का सिलसिला इससे काफी पहले से चल रहा था।

जांच एजेंसियों का यह भी कहना है कि पुराने साक्ष्यों को समाप्त करने या छिपाने की कोशिश की गई हो सकती है, लेकिन बैंक खातों में जमा रकम और वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड आरोपियों के खिलाफ महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आया है।

लंबे समय से खातों में जमा हो रही थी बड़ी धनराशि

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों के बैंक खातों में पिछले काफी समय से नियमित अंतराल पर बड़ी रकम जमा हो रही थी। जब इन जमा राशियों के बारे में पूछताछ की गई तो कोई भी आरोपी यह स्पष्ट नहीं कर सका कि यह पैसा आखिर आया कहां से। इसी आधार पर जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित चोरी की रकम को बैंक खातों के माध्यम से व्यवस्थित तरीके से छिपाने का प्रयास किया जाता रहा।

सुरक्षा नियमों में ढिलाई बनी बड़ी वजह

जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। चढ़ावे की गिनती के लिए जो सुरक्षा व्यवस्था और नियम बनाए गए थे, समय के साथ उनका पालन कमजोर पड़ता गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि सुरक्षा मानकों में आई यही ढिलाई कथित गड़बड़ियों की एक बड़ी वजह बनी।

जांच के दौरान सामने आए प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—

कलेक्शन सेंटर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े निर्धारित नियमों का लगातार उल्लंघन होता रहा।
कर्मचारियों के प्रवेश और निकास के समय होने वाली अनिवार्य तलाशी की प्रक्रिया में धीरे-धीरे लापरवाही बरती जाने लगी।
शुरुआत में गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली टी-शर्ट और पैंट पहनना अनिवार्य था, ताकि नकदी छिपाने की संभावना समाप्त रहे। लेकिन बाद में इस ड्रेस कोड का पालन भी बंद हो गया।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद बनाई गई थी विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था

वर्ष 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और चढ़ावे के सुरक्षित प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्था लागू की गई थी। मंदिर परिसर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 40 दान पात्र स्थापित किए गए थे। वहीं, यात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में विशेष कलेक्शन सेंटर बनाया गया, जहां चढ़ावे की गिनती की जाती थी।

ट्रस्ट की ओर से वहां तैनात कर्मचारियों के लिए कड़े सुरक्षा मानक भी तय किए गए थे, जिनमें निर्धारित ड्रेस कोड, नियमित तलाशी और निगरानी जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं। हालांकि जांच में सामने आया है कि समय बीतने के साथ इन नियमों का पालन कमजोर पड़ता गया और सुरक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर ढिलाई आने लगी।

आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद बढ़ीं आशंकाएं


जांच एजेंसियों के अनुसार, जब भगवान रामलला अस्थायी मंदिर में विराजमान थे, तब श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे की मात्रा सीमित थी। लेकिन भव्य मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्रतिष्ठा के बाद दर्शनार्थियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई और चढ़ावा भी कई गुना बढ़ गया।

बढ़ते कार्यभार को संभालने के लिए बैंक की ओर से चढ़ावे की गिनती में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। इसके बाद महाकुंभ के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंची, जिससे चढ़ावे की मात्रा रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। उस समय नकदी की गिनती के लिए लगभग 40 कर्मचारियों को लगाया गया था।

प्रारंभिक जांच में एजेंसियों का मानना है कि इसी अवधि के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में आई ढिलाई और बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती के बीच कथित अनियमितताओं की शुरुआत हुई। अब जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही किन स्तरों पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका क्या रही।