चढ़ावा चोरी केस के आरोपी लवकुश मिश्रा की बढ़ीं मुश्किलें, 1 करोड़ के निर्माणाधीन मकान पर चलेगा बुलडोजर!

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब जांच केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसकी संपत्तियां भी प्रशासन की जांच के दायरे में आ गई हैं। अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) ने सोहावल तहसील क्षेत्र में बन रहे उसके निर्माणाधीन मकान को लेकर नोटिस जारी किया है। यह नोटिस लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम भेजा गया है। आरोप है कि भवन निर्माण निर्धारित मानकों और स्वीकृत नियमों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है।

प्राधिकरण ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है।

पत्नी को एक सप्ताह में देना होगा जवाब

अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में लवकुश मिश्रा के परिवार से सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जानकारी के अनुसार, यह जमीन अक्टूबर 2025 में लवकुश मिश्रा ने अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी थी। अब उसी भूमि पर निर्माणाधीन मकान को लेकर प्राधिकरण ने आपत्ति दर्ज की है।

यदि तय समय के भीतर नोटिस का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते, तो प्रशासन भवन निर्माण को अवैध मानते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, सभी विकल्पों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

निरीक्षण में सामने आईं निर्माण संबंधी अनियमितताएं

प्राधिकरण के अधिकारियों ने हाल ही में निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्रारंभिक तौर पर यह पाया गया कि निर्माण कार्य स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों को भवन निर्माण प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए मकान मालिक के नाम नोटिस जारी कर दिया गया।

प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि निर्माण कार्य के लिए आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं तथा भवन निर्माण निर्धारित नक्शे और नियमों के अनुसार किया जा रहा था या नहीं।
नक्शे और अनुमति से जुड़े दस्तावेज मांगे

नोटिस में सुप्रिया मिश्रा से पूछा गया है कि क्या मकान निर्माण के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नक्शा लिया गया था। यदि भवन का नक्शा स्वीकृत कराया गया है तो उससे जुड़े सभी दस्तावेज एक सप्ताह के भीतर प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि समय सीमा के भीतर आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जाते या निर्माण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।

जमीन खरीद से लेकर संपत्ति तक की हो रही जांच

जांच एजेंसियों के अनुसार, लवकुश मिश्रा ने यह जमीन उस अवधि में खरीदी थी, जब वह राम मंदिर से जुड़े कार्यों में नियुक्त था। दस्तावेजों के अनुसार, भूमि की रजिस्ट्री लगभग 8.80 लाख रुपये में कराई गई थी, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य करीब 25 लाख रुपये बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस खरीद-फरोख्त से जुड़े वित्तीय पहलुओं और धन के स्रोत की भी पड़ताल कर रही हैं।

इसके साथ ही निर्माण पर हुए खर्च और संपत्ति से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि निवेश का स्रोत क्या था और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई थीं या नहीं।

पहले से जेल में हैं आठ आरोपी

राम मंदिर चढ़ावा मामले में अब तक अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रमाकांत मिश्रा, करुणेश पांडेय, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू, मनीष कुमार यादव समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है और वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों तथा आरोपियों की संपत्तियों की भी गहन पड़ताल जारी है।

इसी कड़ी में अब लवकुश मिश्रा की निर्माणाधीन संपत्ति भी जांच के घेरे में आ गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।