राममंदिर चढ़ावा जांच ने पकड़ी रफ्तार, SIT ने सौंपी शुरुआती रिपोर्ट; नए लोगों से पूछताछ के संकेत

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार करीब 125 पन्नों की इस रिपोर्ट को अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपा गया है। हालांकि रिपोर्ट की सामग्री को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है और इसे शुरुआती जांच का हिस्सा बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और आगे भी कई पहलुओं की पड़ताल जारी रहेगी।

गौरतलब है कि श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से संबंधित कथित गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। जांच दल को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। टीम ने अयोध्या में लगभग एक सप्ताह तक दस्तावेजों, व्यवस्थाओं और संबंधित पक्षों की जांच करने के बाद यह प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में कुछ सुझाव और प्रशासनिक सिफारिशें भी शामिल की गई हैं।

शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद भी जारी रहेगी जांच

एसआईटी प्रमुख और लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अन्य दो सदस्यों के साथ मिलकर यह रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी है। अधिकारियों के मुताबिक रिपोर्ट अब तक जुटाए गए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तैयार की गई है। हालांकि जांच दल के सदस्यों ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कोई टिप्पणी करने से परहेज किया है।

सूत्रों का मानना है कि यह केवल जांच का पहला चरण है और आगे कई नए बिंदुओं पर गहराई से पड़ताल की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि रिपोर्ट जमा करने के बाद एसआईटी की टीम फिर से अयोध्या जाकर दूसरे चरण की जांच शुरू कर सकती है। फिलहाल अधिकारी जांच से जुड़ी जानकारी साझा करने से बच रहे हैं और केवल इतना कहा जा रहा है कि मामले की जांच अभी प्रचलित है।
नए नामों की चर्चा तेज, कई लोग जांच एजेंसियों के रडार पर

जांच के पहले चरण के पूरा होने के बाद अब कुछ नए नाम भी चर्चा में आने लगे हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे कुछ लोग एसआईटी की निगाह में हैं जो आधिकारिक रूप से रामजन्मभूमि परिसर के कर्मचारी नहीं हैं, लेकिन उनका संबंध ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों से रहा है। सूत्रों के अनुसार इन्हीं संबंधों के चलते उन्हें विभिन्न स्तरों पर लाभ मिलने की बात भी सामने आ रही है।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में एसआईटी ऐसे लोगों से भी पूछताछ कर सकती है। सोमवार को जांच दल के सभी सदस्य अयोध्या में मौजूद नहीं थे, इसलिए व्यापक स्तर पर पूछताछ नहीं हो सकी। हालांकि जांच से जुड़े कर्मचारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की छानबीन में जुटे रहे। सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद दूसरे चरण की जांच और अधिक विस्तृत हो सकती है।

दान में मिली धातुओं और उनके उपयोग की भी हो रही पड़ताल

जांच अब केवल चढ़ावे की नकद राशि तक सीमित नहीं रह गई है। दान के रूप में प्राप्त सोना, चांदी और अन्य धातुओं के भंडारण, उपयोग और रिकॉर्ड से जुड़े सवाल भी जांच के दायरे में आ गए हैं। इसके अलावा मंदिर निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी और प्रक्रियागत अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की भी समीक्षा की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मामले का दायरा लगातार बढ़ने के कारण तय समयसीमा में पूरी जांच करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शुरुआत में आरोप केवल चढ़ावे की रकम में कथित हेरफेर तक सीमित थे, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य पहलू भी सामने आने लगे हैं। यही वजह है कि जांच का दायरा पहले की तुलना में काफी व्यापक हो गया है।

सुरक्षा और प्रक्रियाओं में कई स्तरों पर मिलीं खामियां

सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की राशि के प्रबंधन को प्रमुखता से शामिल किया गया है। जांच के दौरान संबंधित लोगों से पूछताछ की गई और कई प्रक्रियाओं का परीक्षण भी किया गया। बताया जा रहा है कि नकदी की गिनती, रिकॉर्ड रखने और दान में मिली धातुओं के संरक्षण के दौरान जिन सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए था, उनमें कई कमियां पाई गई हैं।

जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत भी मिले हैं कि कुछ व्यवस्थाएं निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप संचालित नहीं की जा रही थीं। प्रारंभिक स्तर पर सामने आई इन खामियों ने जांच को और गंभीर बना दिया है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसमें पूरे मामले की विस्तृत तस्वीर सामने आने की उम्मीद की जा रही है।