‘मुजफ्फरनगर सुलगता रहा और बाप-बेटे सैफई में जश्न मनाते रहे…’, ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर करारा प्रहार

उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों का हवाला देते हुए कहा कि जब जिला हिंसा की आग में झुलस रहा था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री सैफई में कार्यक्रमों में व्यस्त थे।

गुरुवार को राजभर मुजफ्फरनगर के खतौली में आयोजित ‘वंचित शोषित एकता रैली’ में शामिल होने पहुंचे थे। रैली के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उनका बयान सीधे तौर पर सपा नेतृत्व पर सवाल उठाने वाला रहा।

राजभर ने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री की पहली जिम्मेदारी राज्य में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखना होती है। उनका आरोप था कि दंगों के दौरान हालात बेहद भयावह थे—लोग गांव छोड़कर पलायन कर रहे थे, जान-माल का नुकसान हो रहा था, लेकिन बाप-बेटे जश्न में मशगूल थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता संकट में थी और नेतृत्व उत्सव में व्यस्त था।

इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा Yogi Adityanath सरकार की तारीफ करते हुए दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में बड़े दंगे नहीं हुए और न ही कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी। उनके अनुसार, अपराध और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है और आज अपराधी कानून के डर में जी रहे हैं।

शंकराचार्य प्रकरण और 1990 की याद


राजभर ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खड़ी सपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने 1990 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय संतों पर लाठीचार्ज हुआ था और तब सत्ता में सपा ही थी। उनका कहना था कि विपक्षी दलों को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने अतीत की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि चाहे कोई भी व्यक्ति हो, यदि कानून हाथ में लेने की कोशिश करेगा तो संविधान अपना काम करेगा।
जातिवाद पर अलग सोच

जाति आधारित राजनीति के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि भारत कभी कृषि प्रधान देश कहा जाता था, लेकिन अब जाति की पहचान राजनीति और प्रशासन पर हावी हो चुकी है। उन्होंने टिप्पणी की कि जब तक सरकारी तंत्र में जाति प्रमाण पत्र की व्यवस्था जारी रहेगी, तब तक जातिवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकता। उन्होंने ‘जाति तोड़ो, समाज जोड़ो’ का नारा देते हुए एक समरस समाज की वकालत की।

भर्तियों और आरक्षण पर आरोप

राजभर ने अखिलेश यादव के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उस दौर में पिछड़े, दलित और खासकर मुस्लिम समुदाय को न्यायसंगत भागीदारी नहीं मिली। उनका दावा था कि वोट तो लिए गए, लेकिन प्रतिनिधित्व और अवसर समान रूप से नहीं दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सरकार में नियुक्तियों में पक्षपात होता था, जबकि वर्तमान सरकार में बिना भेदभाव और बिना रिश्वत योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं।

पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट

आगामी पंचायत चुनावों को लेकर फैल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए राजभर ने कहा कि एनडीए गठबंधन पूरी मजबूती से चुनाव मैदान में उतरेगा। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची 15 मार्च को प्रकाशित की जाएगी और मतपत्रों की छपाई भी पूरी हो चुकी है। जनगणना या परीक्षाओं के कारण चुनाव टलने की बातों को उन्होंने बेबुनियाद बताया और स्पष्ट किया कि चुनाव निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे।