कार-ट्रक की भीषण भिड़ंत में उजड़ गया पूरा परिवार, हजारीबाग में 3 मासूम समेत 6 की दर्दनाक मौत

हजारीबाग जिले की दनुआ घाटी में शनिवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने एक पूरे परिवार को पल भर में खत्म कर दिया। चौपारण क्षेत्र में हुई इस दर्दनाक दुर्घटना में तीन मासूम बच्चों सहित कुल छह लोगों की मौत हो गई। मृतक परिवार बीसीसीएल के गोविंदपुर क्षेत्र अंतर्गत महेशपुर कोलियरी में कार्यरत लाइनमैन शिव कुमार भुइयां का था, जो अपने परिवार के साथ गयाजी के आमस में एक रिश्तेदारी के शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। धनबाद नंबर की उनकी कार जैसे ही दनुआ घाटी के जोड़राही पुल के पास पहुंची, वह आगे चल रहे ट्रेलर से जा टकराई। इससे पहले कि कार सवार संभल पाते, पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे कार दोनों भारी वाहनों के बीच बुरी तरह फंस गई और पूरी तरह चकनाचूर हो गई। हादसे के बाद ट्रक और ट्रेलर के चालक मौके से फरार हो गए।

टक्कर इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वह लोहे के मलबे में तब्दील हो गई। सूचना मिलते ही चौपारण पुलिस मौके पर पहुंची और कार के नंबर के आधार पर धनबाद पुलिस से संपर्क कर मृतकों की पहचान की गई। दुर्घटना का दृश्य इतना भयावह था कि सभी शव कार के अंदर ही बुरी तरह फंसे हुए थे। पुलिस और एनएचएआई की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से लंबे समय तक राहत और बचाव कार्य चलाया। गैस कटर और अन्य उपकरणों की सहायता से कार को काटकर शवों को बाहर निकाला गया। गौरतलब है कि बीते चार दिनों में इसी इलाके में यह पांचवां बड़ा हादसा है, जो यहां की खतरनाक सड़कों और ब्लैक स्पॉट्स की गंभीर समस्या को उजागर करता है। मृतकों में शिव कुमार भुइयां (45), उनकी पत्नी रूबी देवी (38), बेटी सोनी (12), छोटी बेटी सुहानी (9), रिश्तेदार प्रेम (7) सहित एक अन्य परिजन शामिल हैं।
इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को खत्म कर दिया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। जब शवों को बाहर निकाला गया तो उनका हाल देखकर हर किसी की रूह कांप उठी। दुर्घटना की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे। अंधेरे और घाटी के खतरनाक मोड़ों ने इस मंजर को और भी भयावह बना दिया। तेज रफ्तार और सड़क की जटिल स्थिति ने मिलकर इस हादसे को इतना खतरनाक बना दिया कि मासूम बच्चों के शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन दृश्य इतना दर्दनाक था कि अधिक देर तक वहां खड़ा रह पाना भी मुश्किल हो रहा था। कई लोग रो पड़े और पूरे माहौल में शोक और सन्नाटा छा गया। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य को संभाला और सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जब तक पूरी तरह पहचान नहीं हो गई, तब तक शवों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया जारी रखी गई।

इस हादसे में सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि परिवार का केवल एक सदस्य ही जीवित बचा है। शिव कुमार का बेटा रंजीत कुमार इस यात्रा में शामिल नहीं हुआ था और वह अपने घर पर ही रह गया था। बताया जा रहा है कि शनिवार दोपहर करीब 12 बजे परिवार गयाजी के लिए रवाना हुआ था, लेकिन शाम होते-होते यह दुखद खबर पूरे बुदौरा कॉलोनी में फैल गई। पड़ोसियों ने रंजीत को सिर्फ हादसे की जानकारी दी है, लेकिन असल सच्चाई बताने की हिम्मत किसी में नहीं है। पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और हर कोई यही सोच रहा है कि इस मासूम बेटे को उसके परिवार के बारे में कैसे बताया जाएगा।