बिजली व्यवस्था पर सख्त हुए CM योगी, समीक्षा बैठक में दिए कड़े निर्देश, लापरवाही पर चेतावनी

लखनऊ: भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली मांग के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत के साथ ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और औद्योगिक इकाइयों को किसी भी प्रकार की बिजली संकट की स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए पूरी व्यवस्था को लगातार निगरानी में रखा जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि गर्मी के इस चरम दौर में ऊर्जा विभाग पूरी तत्परता, संवेदनशीलता और सक्रियता के साथ काम करे। उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन से लेकर वितरण तक हर स्तर पर सिस्टम को मजबूत किया जाए और किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि बढ़ती मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति में कोई अंतर न आए और हर क्षेत्र में समान रूप से बिजली उपलब्ध रहे।

उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति स्थिर रखने पर जोर


बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और तकनीकी रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए ताकि गर्मियों में निर्बाध आपूर्ति बनी रहे। बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट तक पहुंच गई है, जिसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे प्रमुख तापीय संयंत्रों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है। इसके अलावा जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट और संयुक्त उपक्रमों के तहत मेजा, घाटमपुर व खुर्जा परियोजनाओं से 3,742 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता प्राप्त हो रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि वर्ष 2022 की तुलना में 2026 तक उत्पादन निगम की क्षमता में लगभग 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है, जो राज्य की ऊर्जा स्थिति को और मजबूत बनाता है।

ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को आधुनिक, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति की स्थिरता के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी भी तकनीकी समस्या को तुरंत दूर किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में सिस्टम की सतत निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की बाधा को न्यूनतम स्तर पर रखा जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास वर्तमान में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें कार्यरत हैं, जबकि 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध कराई जा रही है। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है और पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत तक सीमित हो गई हैं, जो व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

लापरवाही पर सख्त रुख, फील्ड स्तर पर जवाबदेही तय

मुख्यमंत्री ने वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फीडर स्तर पर स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए और ट्रांसफॉर्मर खराब होने, लाइन बाधित होने या शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आंधी-तूफान या अत्यधिक तापमान जैसी आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को सक्रिय रखा जाए ताकि बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल हो सके। बैठक में बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान के दौरान प्रदेश में 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे, हालांकि विभागीय टीमों ने तेजी से मरम्मत कर व्यवस्था को सामान्य कर दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर भूमिगत केबल बिछी हैं, वहां खुदाई से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति अनिवार्य रूप से ली जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक बाधा या नुकसान से बचा जा सके।
ट्रांसफॉर्मर क्षति में उल्लेखनीय सुधार, 80% तक कमी दर्ज

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2025-26 में पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति में लगभग 80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफॉर्मर खराब हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर केवल 87 रह गई।

इसी तरह 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर में भी महत्वपूर्ण कमी आई है। वर्ष 2022-23 में 39,177 बड़े ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 20,292 रह गई। अधिकारियों ने बताया कि मजबूत सुरक्षा तंत्र, नियमित मॉनिटरिंग, समयबद्ध मरम्मत और स्पष्ट जवाबदेही प्रणाली के कारण यह सुधार संभव हो पाया है।

बढ़ती गर्मी के साथ बिजली मांग में लगातार वृद्धि

बैठक में यह भी सामने आया कि अप्रैल और मई के महीनों में तापमान में तेज वृद्धि के कारण बिजली की मांग में लगातार उछाल दर्ज किया गया है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत बिजली मांग 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गई। इसी अवधि में पीक डिमांड 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट तक दर्ज की गई।

अधिकारियों ने बताया कि 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश में बिजली मांग पूरी करने के मामले में दूसरे स्थान पर रहा। बढ़ती मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी उपलब्ध स्रोतों से बिजली खरीद और बेहतर आपूर्ति प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही बताया गया कि कुछ पावर प्लांटों में तकनीकी और अन्य कारणों से 15 मई के बाद अस्थायी बाधाएं आईं, बावजूद इसके यूपी पावर कॉरपोरेशन ने 12 राज्यों के साथ पावर बैंकिंग व्यवस्था को सक्रिय रखा है।

दीर्घकालिक ऊर्जा योजना और भविष्य की तैयारी पर जोर

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति अपनाने पर विशेष बल दिया। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2015 से 2026 के बीच राज्य ने 32,305 मेगावाट क्षमता के विद्युत टाई-अप किए हैं, जिसमें पिछले तीन वर्षों में 62 प्रतिशत नई क्षमता जोड़ी गई है। वर्ष 2029 तक अतिरिक्त 10,719 मेगावाट क्षमता जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, जिसमें विंड एनर्जी, बैटरी एनर्जी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड परियोजनाएं शामिल हैं।

ऊर्जा सेवाओं और शिकायत निस्तारण प्रणाली में सुधार


मुख्यमंत्री ने उपभोक्ता सेवाओं को तकनीक आधारित और अधिक पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि नवंबर 2025 से 1912 कॉल सेंटर को एकीकृत प्रणाली के तहत संचालित किया जा रहा है, जिससे लखनऊ और नोएडा केंद्रों के बीच कॉल लोड संतुलित किया जा रहा है। इससे कॉल हैंडलिंग क्षमता 75 हजार से बढ़कर 90 हजार प्रतिदिन हो गई है।

उन्होंने ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली बाधित होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि समाधान की समयसीमा स्पष्ट रूप से बताई जाए, ताकि पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हों।

स्मार्ट मीटर व्यवस्था और बिलिंग सुधार पर फोकस


बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकार के निर्देश पर सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को पोस्टपेड प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया है। जून 2026 से सभी उपभोक्ताओं के बिल हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच जारी किए जाएंगे और उन्हें एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके साथ ही 15 मई से 30 जून तक पूरे प्रदेश में विशेष कैंप लगाकर स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बिलिंग व्यवस्था को और अधिक सटीक और समयबद्ध बनाने पर जोर देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को सही समय पर सही बिल मिलना सुनिश्चित किया जाए।

बिजली आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता, सख्त निगरानी के निर्देश


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बिजली आपूर्ति केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि किसानों, उद्योगों, व्यापार और आम जनता के जीवन से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि फील्ड स्तर पर नियमित निगरानी की जाए, शिकायतों का तुरंत समाधान हो और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में प्रदेशवासियों को निर्बाध और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सभी डिस्कॉम को मिलकर समन्वित रूप से कार्य करना होगा।