भगवान राम पर टिप्पणी से भड़के विष्णु दास, बोले- स्वामी प्रसाद मौर्य की जीभ काटने वाले को देंगे 5 लाख रुपये

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर दिए गए बयान के बाद पूर्व मंत्री और अपनी जनता पार्टी के संस्थापक स्वामी प्रसाद मौर्य एक नए विवाद में घिर गए हैं। भगवान राम और राम मंदिर को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर संत समाज के एक वर्ग ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस बीच महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने उनके खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में एक सभा के दौरान राम मंदिर में हुई कथित चोरी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मंदिर से करोड़ों रुपये मूल्य का सोना-चांदी और अन्य सामग्री चोरी हो गई और भगवान राम उन चोरों को दंड नहीं दिला सके, तो आम लोगों का भला कैसे कर पाएंगे। उनके इस बयान के सामने आने के बाद विभिन्न धार्मिक संगठनों और राम भक्तों की ओर से विरोध दर्ज कराया जाने लगा।

मौर्य ने अपने बयान में कहा कि जब किसी मंदिर की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं हो सकी और वहां चोरी जैसी घटना हो गई, तो लोगों को यह सोचने की जरूरत है कि आखिर उनकी आस्था किस आधार पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि जो अपने मंदिर की रक्षा नहीं कर सकता, वह दूसरों की रक्षा कैसे करेगा। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धार्मिक मान्यताओं की समझ नहीं है। उनके अनुसार राम मंदिर में जो भी चढ़ावा आता है, वह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक होता है और किसी भी चोरी की घटना को भगवान की शक्ति से जोड़कर इस प्रकार की टिप्पणी करना अनुचित है।

विष्णु दास महाराज ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार सनातन धर्म और उसकी परंपराओं के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं। उनका आरोप है कि मौर्य का उद्देश्य केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करना और समाज में भ्रम पैदा करना है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और उसके बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महामंडलेश्वर ने आगे कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य बार-बार ऐसे बयान देकर सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौर्य की राजनीति सनातन विरोधी विचारों पर आधारित है और वे लगातार हिंदू धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाते रहे हैं। उनके अनुसार ऐसे बयानों से समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है।
विवाद को और बढ़ाते हुए विष्णु दास महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति स्वामी प्रसाद मौर्य की जीभ काटकर लाएगा, उसे पांच लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यदि उनकी जीभ ही नहीं रहेगी तो वे भविष्य में राम मंदिर और सनातन धर्म के खिलाफ कोई बयान नहीं दे पाएंगे। हालांकि उनके इस बयान पर भी विभिन्न वर्गों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

उन्होंने कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां स्थापित राम मंदिर को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों को समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। विष्णु दास महाराज ने कहा कि राम भक्तों के लिए भगवान राम केवल धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि जीवन के आदर्श हैं और उनके प्रति किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी लोगों को आहत करती है।

महामंडलेश्वर ने यह भी कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य राम भक्तों की भावनाओं को समझने में असफल रहे हैं। उनके अनुसार मौर्य का रवैया लगातार संस्कृति, सनातन परंपरा और राम मंदिर के प्रति विरोधी रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम करते हैं।

फिलहाल स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान और उसके जवाब में दिए गए विष्णु दास महाराज के विवादित ऐलान को लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है। एक ओर मौर्य अपने बयान पर कायम दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी ओर संत समाज का एक वर्ग उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है।