CM भजनलाल शर्मा पर कथित जातिसूचक टिप्पणी को लेकर हनुमान बेनीवाल से माफी की मांग, विप्र फाउंडेशन ने जताया कड़ा विरोध

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में हाल ही में दिए गए एक बयान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जयपुर विप्र फाउंडेशन ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रमुख एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संदर्भ में की गई कथित जातिसूचक टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन ने इस टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए बेनीवाल से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने कहा कि ब्राह्मण समाज सदैव सामाजिक समरसता, समानता और सर्वजन हिताय की भावना के साथ कार्य करता आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ब्राह्मण समाज में किसी प्रकार की ऊंच-नीच की सोच का कोई स्थान नहीं है और समाज के सभी लोग समान सम्मान के अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न वर्गों को भी गर्व है, क्योंकि वे सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की सोच के साथ कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए जातिगत आधार पर टिप्पणी करना लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सद्भावना के खिलाफ है। ऐसे बयान समाज में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकते हैं और विभिन्न वर्गों के बीच दूरी बढ़ाने का कारण बन सकते हैं।

इस पूरे प्रकरण को लेकर विप्र फाउंडेशन की ओर से एक निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया कि सार्वजनिक मंचों से जातिसूचक या विभाजनकारी टिप्पणियां करना सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं माना जा सकता। संगठन का मानना है कि इस प्रकार के वक्तव्य भाईचारे और आपसी विश्वास की भावना को कमजोर करते हैं तथा समाज को बांटने का काम करते हैं।
विप्र फाउंडेशन के राजस्थान क्षेत्रीय अध्यक्ष सतीश शर्मा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भरतपुर में आयोजित जिस रैली के दौरान यह टिप्पणी की गई, वहां मौजूद आयोजकों को भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए इसका विरोध करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश के ऐसे जननेता हैं, जो समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस प्रकार की टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत मर्यादा के विरुद्ध है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित करने वाली मानी जा सकती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत या जातिगत टिप्पणियों से बचना सभी नेताओं की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि केवल सुर्खियों में बने रहने या राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए दिए जाने वाले विवादित बयान समाज में वैमनस्य का वातावरण तैयार कर सकते हैं। संगठन ने ऐसे बयानों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए राजनीतिक नेताओं से संयमित भाषा के प्रयोग की अपील की है।

इस बीच विप्र फाउंडेशन युवा भरतपुर के प्रदेशाध्यक्ष अनुपम तिवाड़ी ने भी इस मामले को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि समाज की गरिमा और सम्मान बनाए रखने के लिए संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएगा।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर संबंधित पक्षों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।