धर्मांतरण के बड़े आरोपों से घिरे जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की असलियत जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही सोचने पर मजबूर करने वाली भी। पढ़ा-लिखा न होने के बावजूद उसकी चालाकी किसी शातिर मास्टरमाइंड से कम नहीं रही। मोटे मुनाफे के लालच में लोगों को अपने जाल में फंसाकर वह सिर्फ धर्मांतरण का ही नहीं, संपत्ति खरीद-बिक्री का गोरखधंधा भी करता था। खास बात यह रही कि उसने करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी तो बनवाई, लेकिन एक भी जमीन अपने नाम नहीं रखी। सब कुछ नीतू उर्फ नसरीन के नाम करवा दिया।
बलरामपुर के उतरौला नगर में खरीदी गई सारी संपत्तियों के दस्तावेज नीतू के नाम दर्ज हैं। राजस्व विभाग ने भी इन सभी संपत्तियों की डिटेल खंगालनी शुरू कर दी है। खबर है कि दो दुकानों पर जल्द ही बुलडोजर भी चल सकता है। मधपुर के अलावा मोहल्ला रफीनगर में भी सह खाते में ज़मीन खरीदकर दुकानों का निर्माण करवाया गया। लेकिन अब जब छांगुर सलाखों के पीछे है, तो वहां ताले लटक रहे हैं। पुणे तक में छांगुर ने जमीन का एग्रीमेंट नीतू के नाम से कराया। जिला प्रशासन की नजरें अब हर उस संपत्ति पर हैं, जिनका संबंध छांगुर से जुड़ा हुआ है।
स्विस बैंक खाता और विदेशी फंडिंग की चौंकाने वाली परतेंछांगुर बाबा के खेल यहीं खत्म नहीं होते। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि उसका एक खाता स्विस बैंक में भी है, जिसमें करोड़ों रुपये जमा किए गए थे। यह रकम दुबई, पाकिस्तान और तुर्किए जैसे देशों से विदेशी फंडिंग के जरिए आई थी। खासकर भारत-नेपाल सीमा पर बसे इलाकों में वह इस पैसे से धर्मांतरण का नेटवर्क चला रहा था। सूत्रों के अनुसार, छांगुर का एक सहयोगी विदेशों के कई दौरों पर भी गया था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि तीन साल में छांगुर को करीब 500 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग मिली थी। जिसमें से 200 करोड़ की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल में भी उसके कई सहयोगी थे, जिनके खातों में भारी लेन-देन हुआ। काठमांडू से लेकर सीमावर्ती जिलों तक के कई खातों से छांगुर का सीधा संबंध रहा। फंडिंग करने वाले लोग उसके लिए स्लीपर सेल की तरह काम करते थे।
लव जिहाद की चपेट में टूटे कई परिवार, अब डर के साए में जी रहे हैं लोगधर्मांतरण के लिए छांगुर ने लव जिहाद को भी हथियार बनाया। उसने अपने सहयोगियों को कॉलर ट्यून में धार्मिक संगीत लगाने की सलाह दी, ताकि सामने वाला झांसे में आ जाए। एक ग्रामीण युवक ने बताया कि छांगुर से मिलने वालों की लाइन सुबह से ही लग जाती थी। लोग दुआ और ताबीज के लिए आते थे लेकिन असल में धीरे-धीरे फंस जाते थे।
छांगुर खास तौर से हिन्दू महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाता था। जब परिवारों को सच्चाई समझ में आती, तब तक बहुत देर हो चुकी होती। कई परिवार टूट गए, कुछ लोग तो गांव छोड़कर दूसरे शहरों में बस गए। खुफिया एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि छांगुर के कारण कितने परिवार प्रभावित हुए और क्या इसके कारण पलायन भी हुआ।