राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व से रविवार को एक दुखद खबर सामने आई। खंडार रेंज में रहने वाली बाघिन टी-94 मृत अवस्था में पाई गई। इस घटना के बाद वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ वन्यजीव प्रेमियों में भी शोक का माहौल है। लंबे समय से इस क्षेत्र में विचरण करने वाली यह बाघिन रणथंभौर के प्रमुख बाघों में से एक मानी जाती थी।
गश्त के दौरान वनकर्मियों को मिली जानकारीवन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह नियमित पेट्रोलिंग के लिए निकली टीम को यह जानकारी मिली। खंडार रेंज के घोड़ा घाटी इलाके के नीचे स्थित वन क्षेत्र में गश्त कर रहे कर्मचारियों की नजर बाघिन के शव पर पड़ी।
जैसे ही वनकर्मियों को इसकी जानकारी हुई, तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही रणथंभौर टाइगर रिजर्व के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए बाघिन के शव को अपने कब्जे में लिया गया और उसे राजबाग वन चौकी लाया गया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टमराजबाग वन चौकी में वेटिनरी बोर्ड के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार संपन्न कराई गई।
जांच पूरी होने के बाद वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में नियमानुसार बाघिन का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और दस्तावेजीकरण भी किया गया, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की जांच के लिए रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
लंग्स फेलियर को माना जा रहा संभावित कारणपशु चिकित्सक डॉ. सी.पी. मीणा के अनुसार शुरुआती जांच में बाघिन की मौत का संभावित कारण लंग्स फेलियर माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान बाघिन के फेफड़े और लिवर समेत शरीर के कई अंग काफी खराब स्थिति में पाए गए।
डॉक्टरों का कहना है कि संभवतः अंगों के खराब होने की वजह से ही उसकी प्राकृतिक मौत हुई होगी। हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम के दौरान कुछ नमूने भी लिए गए हैं। इन सैंपलों को आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम कारण स्पष्ट हो सकेगा।
खंडार रेंज में था बाघिन का प्रमुख इलाकारणथंभौर टाइगर रिजर्व के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि बाघिन टी-94 की उम्र लगभग साढ़े दस से ग्यारह वर्ष के बीच थी। वह लंबे समय से खंडार रेंज के कई वन क्षेत्रों में सक्रिय रूप से विचरण कर रही थी।
उसका क्षेत्र मुख्य रूप से ओंदी खोह, मूड घुसा, इंडाला, खटोला, कासेरा, बालाजी, घोड़ा घाटी, विंध्यकड़ा और फरिया जैसे इलाकों तक फैला हुआ था। इन क्षेत्रों में अक्सर उसकी गतिविधियां देखी जाती थीं और वन विभाग की निगरानी भी लगातार बनी रहती थी।
डीएफओ ने यह भी बताया कि जब बाघिन का शव मिला, तब वह पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में था। प्रारंभिक जांच में किसी तरह के शिकार या बाहरी हमले के संकेत नहीं मिले हैं। फिलहाल वन विभाग पूरी घटना की जांच कर रहा है और प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर पूरी स्थिति साफ हो सकेगी।