समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित चीन दौरे को लेकर तीखी टिप्पणी की है। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने एक बार फिर अपनी चुटीली शैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा।
योगी के नाम बदलने की आदत पर तंजअखिलेश यादव ने मजाकिया लहजे में कहा, “अगर प्रधानमंत्री चीन जा रहे हैं तो बेहतर होगा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी साथ ले जाएं। वो नाम बदलने में तो माहिर हैं, क्या पता वहां जाकर चीन का नाम भी कुछ और रख दें!”
उनकी यह टिप्पणी एक ओर जहां हल्के-फुल्के अंदाज में दी गई, वहीं इसमें सरकार की कार्यशैली पर गहरा व्यंग्य भी छिपा था।
नीतियों पर सीधा हमला: युवाओं-किसानों की अनदेखीसीएम योगी पर कटाक्ष करने के बाद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “हमारे देश के किसान तबाह हो रहे हैं, उद्योग बंद हो रहे हैं, व्यापार दम तोड़ रहा है और युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। अगर यही स्थिति रही, तो भारत का भविष्य कहां जा रहा है?”
उन्होंने केंद्र की नीतियों को दिशाहीन बताते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। “जब हम ये कहते हैं कि भारत के सारे देशों से बेहतर रिश्ते हैं, तो आज हालात ऐसे क्यों हैं कि हमारे ऊपर अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां लग रही हैं? क्या यही हमारी सफल विदेश नीति है?” – अखिलेश ने पूछा।
बाहरी सम्मान के दावों पर सवालसपा प्रमुख ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि “दुनिया में भारत का डंका बज रहा है।” उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में हमारे अंतरराष्ट्रीय रिश्ते इतने बेहतरीन हैं, तो देश को बार-बार वैश्विक मंचों पर अपमान क्यों झेलना पड़ता है?
उन्होंने कहा, “हमारी विदेश नीति पूरी तरह असफल रही है। देश के भीतर किसान और युवा परेशान हैं, बाहर से दबाव बढ़ रहा है और अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। ऐसे में देश चारों ओर से संकट में घिरा दिखाई देता है।”
पीएम मोदी का प्रस्तावित चीन दौरा: बढ़ती हलचलगौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को दो दिवसीय यात्रा पर चीन जाने वाले हैं। यह दौरा गलवान घाटी में भारत-चीन संघर्ष के बाद उनका पहला चीन दौरा होगा। पीएम मोदी इस दौरान शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेंगे।
अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ बढ़ाने की पृष्ठभूमि में यह दौरा वैश्विक राजनीतिक समीकरणों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में विपक्ष की तीखी टिप्पणियां सरकार की विदेश नीति पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही हैं।