राजस्थान के बूंदी जिले में मंगलवार को एक हृदयविदारक हादसे ने तीन मासूम बच्चों से उनके माता-पिता का साया छीन लिया। डॉक्टर को दिखाकर घर लौट रहे दंपति को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे गांव को गहरे शोक में डाल दिया है और पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
कार की टक्कर से उड़ी जिंदगी की डोरदबलाना थाना क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 148D पर यह हादसा कुम्हराला बालाजी के पास हुआ, जहां तेज गति से आ रही कार ने सामने से आ रही बाइक को जबरदस्त टक्कर मार दी। बाइक पर सवार दिनेश वर्मा (33) और उनकी पत्नी गीता वर्मा (31) को टक्कर इतनी भीषण थी कि वे दूर तक घिसटते चले गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
इलाज के बाद लौटते समय हुआ हादसादंपति नैनवां थाना क्षेत्र के रजलावता गांव के निवासी थे। गीता की तबीयत खराब होने पर दिनेश उन्हें कोटा के एमबीएस हॉस्पिटल ले गए थे। वहां इलाज करवाने के बाद दोनों बाइक से अपने गांव लौट रहे थे कि रास्ते में यह दर्दनाक हादसा हो गया। राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और दोनों को हिण्डोली हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें बूंदी और कोटा रेफर किया गया।
इलाज के दौरान दोनों की मौतबूंदी जिला हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दिनेश की मौत हो गई, जबकि गीता को कोटा के एमबीएस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां देर रात उसने भी दम तोड़ दिया। दोनों के शवों का मंगलवार को पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपा गया। दंपति का एक साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
तीन मासूमों के सिर से उठा माता-पिता का सायामृतक दंपति के तीन छोटे बच्चे हैं, जो अब पूरी तरह अनाथ हो गए हैं। इस हादसे की खबर जैसे ही गांव में फैली, पूरा माहौल शोकाकुल हो गया। परिजनों की चीख-पुकार और बच्चों की मासूमियत ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। गांव में मातम पसरा है और हर कोई बच्चों की भविष्य की चिंता में डूबा है।
अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्जदबलाना थाने के एएसआई महेन्द्र वर्मा ने बताया कि हादसे के बाद अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर आरोपी चालक की पहचान में जुटी है। फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है।
बूंदी का यह सड़क हादसा न केवल एक परिवार को उजाड़ गया बल्कि तीन मासूमों के जीवन को भी अंधेरे में धकेल गया। यह घटना राज्य में बढ़ते सड़क हादसों और लापरवाह ड्राइविंग की गंभीरता को उजागर करती है। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और कड़ी सजा ही भविष्य की दुर्घटनाओं को रोक सकती है। साथ ही, समाज को भी आगे आकर अनाथ हुए बच्चों की देखरेख में सहयोग करना चाहिए, ताकि वे अपने माता-पिता की कमी को कम से कम महसूस करें।