पाकिस्तान का दावा फेल! सीजफायर के दिन अमेरिका ने किया खेला, ईरान ने कहा – शर्तों का हुआ उल्लंघन

ईरान और अमेरिका के बीच कथित सीजफायर समझौते को लेकर नई जटिलता उभर कर सामने आई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के दावे पर अब अमेरिका और ईरान दोनों ने सवाल उठाए हैं, खासकर लेबनान को लेकर की गई घोषणा को लेकर।

शहबाज शरीफ के दावे पर उठे सवाल

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए मध्यस्थता वाले युद्धविराम समझौते में सभी पक्ष, जिसमें अमेरिका के सहयोगी देश और लेबनान भी शामिल हैं, ने दो हफ्ते के लिए हमले रोकने और बातचीत के लिए सहमति दे दी। लेकिन अमेरिकी व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि लेबनान कभी भी इस सीजफायर का हिस्सा नहीं था और सभी पक्षों को इसकी जानकारी पहले ही दी गई थी।

सीजफायर के बावजूद हमले जारी

युद्धविराम की घोषणा के बाद भी इजरायल ने लेबनान में हिज़बुल्लाह ठिकानों पर लगातार हमले जारी रखे। विरोध स्वरूप ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज को फिर से बंद कर दिया। इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शहबाज शरीफ की X पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया और लेबनान और अमेरिका के सहयोगी देशों को शामिल करने वाली लाइन को हाईलाइट किया।

ईरान का अमेरिका पर दबाव

अराघची ने लिखा कि अमेरिका को तय करना होगा कि वह युद्धविराम को वास्तविक रूप में लागू करेगा या इजरायल के जरिए हिंसा जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि दोनों एक साथ संभव नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी दुनिया लेबनान में हो रही हिंसा को देख रही है और अब फैसला अमेरिका के हाथ में है कि वह अपने वादों पर कितना कायम रहता है।
इजरायल और व्हाइट हाउस की सफाई

अराघची के बयान के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि लेबनान को इस सीजफायर में कभी शामिल नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने लेबनान में हिज़बुल्लाह को बड़ा झटका दिया है। इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने साफ किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था।

उठ रहे बड़े सवाल

अब यह सवाल उठ रहा है कि जब अमेरिका और इजरायल दोनों लेबनान को सीजफायर का हिस्सा नहीं मान रहे, तो क्या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने जानबूझकर ईरान को गुमराह किया, या अमेरिका ने आखिरी समय में अपने वादे से पीछे हटते हुए समझौते का उल्लंघन किया?

ईरान संसद के स्पीकर का बड़ा बयान

ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले ही दस प्रस्तावों में से तीन का उल्लंघन हो चुका है। उन्होंने बताया कि ऐसे हालात में द्विपक्षीय युद्धविराम और वार्ता का कोई औचित्य नहीं रह जाता। गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के प्रति ईरान का ऐतिहासिक अविश्वास बार-बार ऐसे उल्लंघनों के कारण है और दुर्भाग्यवश यह स्थिति फिर से सामने आई।

तीन बड़े उल्लंघनों का दावा

स्पीकर के अनुसार, अमेरिका ने यह माना था कि ईरान का दस सूत्रीय प्रस्ताव वार्ता का व्यावहारिक आधार होगा। लेकिन तीन महत्वपूर्ण बिंदु शुरू होने से पहले ही उल्लंघित हो गए। पहला, लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं हुआ। दूसरा, ईरान में ड्रोन हमलों की कोशिश की गई। तीसरा, अमेरिका और इजरायल ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मानने से इनकार किया। इस पूरी घटनाक्रम ने न केवल सीजफायर समझौते बल्कि भविष्य की वार्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।