जयपुर। राजस्थान में निवेश को लेकर शुरू की गई राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप निवेश समझौतों (एमओयू) को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नवंबर 2026 तक निर्धारित सभी ग्राउंडिंग लक्ष्यों को हर हाल में पूरा किया जाए और निवेश परियोजनाओं की प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में राइजिंग राजस्थान के तहत विभिन्न विभागों द्वारा किए गए एमओयू की प्रगति और नवंबर 2026 तक तय ग्राउंडिंग लक्ष्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों को नियमित अंतराल पर समीक्षा बैठकें आयोजित करने और लंबित मामलों का तय समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अब फोकस केवल एमओयू नहीं, बल्कि निवेश को जमीन पर उतारने परवी. श्रीनिवास ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर करना नहीं है, बल्कि उन परियोजनाओं को वास्तविक रूप से शुरू कर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि सभी विभाग अपने स्तर पर लंबित प्रस्तावों और फाइलों को प्राथमिकता से निपटाएं ताकि निवेश परियोजनाओं में किसी तरह की देरी न हो।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला स्तर पर संबंधित कलेक्टरों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखें और जिन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा आ रही है, उसका शीघ्र समाधान किया जाए। उनके अनुसार समयबद्ध कार्रवाई से ही निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और परियोजनाएं तय समय पर शुरू हो सकेंगी।
ऊर्जा विभाग की भूमिका सबसे अहममुख्य सचिव ने कहा कि निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में ऊर्जा विभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उद्योगों की स्थापना और निवेश परियोजनाओं के संचालन के लिए बिजली और ऊर्जा संबंधी व्यवस्थाएं सबसे अहम आधार होती हैं। इसलिए ऊर्जा विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तेज गति से काम करने की आवश्यकता है, ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके।
35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव विभिन्न चरणों मेंबैठक के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) शिखर अग्रवाल ने विभागवार प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि राइजिंग राजस्थान के तहत अब तक 11 हजार से अधिक सक्रिय एमओयू पर काम चल रहा है, जिनके माध्यम से 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव विभिन्न चरणों में हैं।
उन्होंने बताया कि इनमें से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग पहले ही हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि नवंबर 2026 तक निर्धारित ग्राउंडिंग लक्ष्य पूरी तरह हासिल किए जाएं और इसके लिए सभी विभाग तय कार्ययोजना के अनुसार लगातार काम कर रहे हैं।
लंबित अनुमतियों के त्वरित निस्तारण पर जोरशिखर अग्रवाल ने बताया कि निवेश परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए भूमि आवंटन, विभिन्न विभागों से मिलने वाली अनुमतियां, एनओसी, लेटर ऑफ इंटेंट (LOI), लेटर ऑफ परमिशन (LOP) तथा अन्य लंबित प्रक्रियाओं का तेजी से निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि निवेशकों को किसी प्रकार की अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और परियोजनाएं समय पर शुरू हो सकें।
वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों ने लिया हिस्सासमीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा, शिखर अग्रवाल, संदीप वर्मा, कुलदीप रांका, प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़, टी. रविकांत, भवानी सिंह देथा सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा नगरीय विकास एवं आवासन, स्कूल शिक्षा, आयुष, पशुपालन, मत्स्य एवं गौ-पालन, कृषि, नागरिक उड्डयन, स्वायत्त शासन, सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, आरआरईसीएल, पर्यटन, आरसीडीएफ, रीको, उद्योग एवं वाणिज्य तथा आरवीयूएनएल विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े और अपने-अपने जिलों में निवेश परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी साझा की।