राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र में स्थित विधानसभा भवन कल एक खास अंतरराष्ट्रीय आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। यहां आयोजित होने वाले एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में दुनिया के 17 देशों से आए प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय रंग में नजर आएगा।
इस कार्यक्रम में बांग्लादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया और जाम्बिया समेत कुल 17 देशों के 43 प्रतिभागी शामिल होंगे। यह 37वां अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी (PRIDE) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को भारत की विधायी प्रणाली, संसदीय परंपराओं और कार्यप्रणाली की गहन जानकारी देना है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान दिया जाएगा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी कराया जाएगा। इसमें विधानसभा के पीठासीन अधिकारियों और सचिव के साथ संवाद, विधि विशेषज्ञों से मुलाकात और राज्य के प्रमुख विधि संस्थानों का भ्रमण भी शामिल है। इससे प्रतिभागियों को भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
यह प्रशिक्षण भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) योजना के तहत आयोजित किया जा रहा है, जो विदेश मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘इंटरनेशनल लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग’ रखा गया है, जिसके जरिए प्रतिभागियों को कानून निर्माण की प्रक्रिया, उसके सिद्धांतों और तकनीकी पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के अनुसार, 18 अप्रैल को यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल राजस्थान विधानसभा के सदन, भवन और राजनीतिक आख्यान संग्रहालय का दौरा करेगा। इसके साथ ही उन्हें राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराया जाएगा, जिसके तहत प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी प्रस्तावित है।
इस तरह के आयोजनों से न केवल भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है, बल्कि विभिन्न देशों के बीच संसदीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलता है। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।