राजस्थान की सियासत में जारी बयानबाजी के बीच कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने बुधवार को ऐसा बयान दिया, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया तीखे बयानों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। करौली जिले के सकरघटा गांव में आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए पायलट ने साफ कहा कि उनके लिए साथ काम करने वाले सभी नेता सम्मान के योग्य हैं और किसी से व्यक्तिगत दूरी नहीं है।
अपने संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उसे मनभेद में बदलने की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने गहलोत का नाम लिए बिना कहा कि विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन दिल में किसी के लिए दुर्भावना नहीं होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अनुशासन, संयम और धैर्य को सबसे बड़ी ताकत बताया।
‘सम्मान और संयम ही राजनीति की असली पहचान’—पायलटपूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि जो भी लोग उनके साथ राजनीतिक जीवन में जुड़े रहे हैं, वे सभी उनके लिए सम्माननीय हैं। उन्होंने कहा कि मतभेद विचारों में हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर किसी से कोई दूरी नहीं है।
पायलट ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि राजनीति में शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि एक बार बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते। उन्होंने आगे कहा कि सच्चाई, संयम और संतुलन हर नेता के जीवन का आधार होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में हमारी भूमिका सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं होती, बल्कि हम आने वाली पीढ़ी को किस तरह के संस्कार देते हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, देश की दिशा तभी सही होगी जब शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी महत्व दिया जाएगा।
अनुशासन और धैर्य को बताया राजनीति की नींवकांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीतिक जीवन में अनुशासन, धैर्य और आत्मनियंत्रण बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि जनता और देशहित हमेशा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, जबकि पार्टी और विचारधारा उसके बाद आती है।
पायलट ने यह भी कहा कि मेहनत करने वाले व्यक्ति की कोशिश कभी व्यर्थ नहीं जाती। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में प्रेम और संवाद की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि असहमति होने के बावजूद भी लोगों के प्रति सम्मान और अपनापन बनाए रखना चाहिए, ताकि मतभेद धीरे-धीरे सहयोग में बदल सकें।
गहलोत के बयानों के बाद बढ़ी सियासी हलचलगौरतलब है कि हाल ही में अशोक गहलोत ने 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में उस समय जो स्थिति बनी थी, वह किसी बगावत का हिस्सा नहीं थी, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर असहमति का परिणाम थी।
उनके अनुसार, उस समय कुछ विधायकों में नाराजगी थी, जो राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सामने आई। गहलोत ने यह भी कहा था कि पार्टी नेतृत्व के फैसलों को लेकर मतभेद की स्थिति बनी थी, जिसने घटनाक्रम को जटिल बना दिया था।
25 सितंबर 2022 की CLP बैठक बनी थी अहम मोड़राजस्थान की राजनीति में 25 सितंबर 2022 का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जब जयपुर में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में राज्य नेतृत्व को लेकर निर्णय का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष को देने का प्रस्ताव लाया जाना था, लेकिन परिस्थितियां अचानक बदल गईं।
AICC पर्यवेक्षकों की मौजूदगी और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बैठक बुलाए जाने के बावजूद कई विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बजाय वे शांति धारीवाल के आवास पर एकत्र हो गए थे, जिससे राजनीतिक संकट गहरा गया था।
इसके चलते वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका, जो आमतौर पर बिना किसी बाधा के स्वीकार कर लिया जाता है। बाद में इस घटनाक्रम ने राजस्थान कांग्रेस की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया।
2020 की राजनीतिक घटना और उसके असर का जिक्रअशोक गहलोत ने पहले यह भी आरोप लगाया था कि 2020 में सचिन पायलट द्वारा की गई राजनीतिक गतिविधियों के कारण पार्टी में असंतोष पैदा हुआ था। उस समय पायलट उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, लेकिन बाद में उन्हें दोनों पदों से हटा दिया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं के बीच दूरी और राजनीतिक तनाव लंबे समय तक चर्चा में रहा। पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को संभाला गया, लेकिन आंतरिक मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हो सके।
सकरघटा में भावुक पल, पिता राजेश पायलट को किया यादकार्यक्रम के दौरान सचिन पायलट ने अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राजेश पायलट की प्रतिमा का अनावरण भी किया। इस मौके पर उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके पिता ने भारतीय वायुसेना की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर जनता की सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बनाया था।
उन्होंने कहा कि उनके पिता का मानना था कि सच्चा नेता वही होता है जो लोभ, लालच और पद की दौड़ से दूर रहकर केवल जनता के हित में कार्य करे। पायलट ने कहा कि उनके पिता हमेशा कांग्रेस पार्टी के सच्चे सिपाही बने रहे और जीवनभर जनसेवा के लिए समर्पित रहे।