नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस ने बीजेपी के आईटी सेल और सोशल मीडिया समर्थकों पर निशाना साधते हुए दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्राओं ने खुद को सुरक्षित महसूस किया, जबकि उन्हें सबसे ज्यादा डर और असुरक्षा सोशल मीडिया पर मिलने वाली धमकियों से है। कांग्रेस का कहना है कि ऑनलाइन ट्रोलिंग और अभद्र टिप्पणियां छात्राओं के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। वहीं, बीजेपी ने इस पूरे प्रदर्शन को लेकर अलग ही तस्वीर पेश करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
जंतर-मंतर पर छात्राओं ने खुद को बताया सुरक्षित: गौरव गोगोईलोकसभा में विपक्ष के उपनेता और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की सबसे सकारात्मक बात यह रही कि वहां मौजूद कई छात्राओं ने खुलकर कहा कि वे खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रही थीं। उनके मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल छात्र एक-दूसरे का सहयोग कर रहे थे और लड़कियों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा था। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान माहौल सहयोगात्मक था और प्रतिभागियों के बीच आपसी सम्मान देखने को मिला।
ऑनलाइन धमकियों को लेकर कांग्रेस ने जताई चिंतागौरव गोगोई ने कहा कि असली समस्या प्रदर्शन स्थल पर नहीं, बल्कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर दिखाई देती है। उनका आरोप है कि सत्तारूढ़ दल का समर्थन करने वाले कुछ सोशल मीडिया अकाउंट छात्राओं को अपशब्द कहते हैं और उन्हें गंभीर धमकियां तक देते हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्रोलिंग का यह माहौल बेहद चिंताजनक है और इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने मांग की कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और धमकी भरी सामग्री साझा करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।
बीजेपी का पलटवार, प्रदर्शन में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के शामिल होने का आरोपदूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए छात्र आंदोलन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तेलंगाना बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी एन. वी. सुभाष ने दावा किया कि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल थे। उनका आरोप है कि प्रदर्शन में वास्तविक छात्रों की तुलना में आपराधिक इतिहास रखने वाले लोगों की संख्या अधिक थी, जिससे आंदोलन की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट का हवाला देकर लगाए गंभीर आरोपएन. वी. सुभाष ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दावा किया कि उन्होंने दिल्ली पुलिस की एक रिपोर्ट के आधार पर यह आरोप लगाया है। उनके अनुसार, प्रदर्शन में कथित तौर पर हत्या के मामलों से जुड़े 101, हत्या के प्रयास के 62, दुष्कर्म के 60 और डकैती एवं लूट जैसे मामलों में आरोपी 2,089 लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर लगभग 3,000 ऐसे लोगों की मौजूदगी का दावा किया गया है, जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही है।
विपक्षी दलों पर भी साधा निशानाबीजेपी नेता ने आगे आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के समर्थन से आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों ने छात्र आंदोलन में घुसपैठ कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अशांति फैलाना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाना था। उन्होंने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी पर भी राजनीतिक लाभ के लिए छात्र आंदोलन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से 'जेन-ज़ी' तक अपना संदेश पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उसका स्वागत करने के बजाय उस पर सवाल उठाए। सुभाष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सभी 140 करोड़ भारतीयों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं।