जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। इसके जरिए किसानों, पशुपालकों, युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सहकारिता के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने और उनके दायरे का विस्तार करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की ओर से बनाए गए गोदामों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सहकारिता गतिविधियों को पारंपरिक दायरे से आगे बढ़ाकर नए क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाए और नवाचारों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने सहकारी मॉडल पर आधारित ‘भारत टैक्सी’ पहल को प्रदेश में प्रोत्साहित करने तथा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के विस्तार के लिए भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय मंच पर पहुंचेगा राजस्थान के सहकारिता मॉडल का अनुभवबैठक के दौरान बताया गया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सोमवार (7 जुलाई) को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में सहकारिता मंत्रालय का पांचवां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी भाग लेंगे। इस राष्ट्रीय आयोजन के माध्यम से राजस्थान में सहकारिता के क्षेत्र में किए गए नवाचारों, सुधारों और उपलब्धियों को देशभर के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे राजस्थान के सहकारिता मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और अन्य राज्यों के लिए भी यह प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
डिजिटलीकरण और भंडारण व्यवस्था में राजस्थान बना अग्रणीमुख्यमंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य ने सहकारिता क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत राजस्थान में 200 गोदामों को मंजूरी मिली है, जिनमें से 120 का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इस योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान वर्तमान में देश में प्रथम स्थान पर है।
इसके अलावा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को भारतीय बीज सहकारी समिति से जोड़ने, नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के गठन, ई-पैक्स के कंप्यूटरीकरण तथा 10 करोड़ से अधिक ईआरपी ट्रांजेक्शन के जरिए सहकारी संस्थाओं के डिजिटलीकरण में भी राजस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राज्य की पैक्स समितियां अब कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और किसान उत्पादक संगठन (FPO) जैसी अनेक सेवाएं उपलब्ध कराकर ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा वितरण का प्रभावी मॉडल बन चुकी हैं।
लाखों नए सदस्य जुड़े, किसानों को भुगतान भी हुआ तेजराजस्थान सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। राज्य में किसान सम्मान निधि, गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना और रिस्क रिलीफ फंड जैसी योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। वहीं वर्ष 2025-26 के दौरान सहकारी बैंकों और पैक्स के माध्यम से वितरित फसली ऋणों की 97.48 प्रतिशत वसूली दर्ज की गई है, जिसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इसके साथ ही राजफेड द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद के दौरान भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तेज बनाया गया है। पहले किसानों को भुगतान मिलने में जहां लगभग 15 दिन का समय लगता था, वहीं अब यह अवधि घटकर केवल 4 से 5 दिन रह गई है। सरकार के सहकार सदस्यता अभियान के तहत प्रदेशभर में 8.90 लाख नए लोगों को सहकारिता आंदोलन से जोड़ा गया है। इन्हीं उपलब्धियों के चलते राजस्थान को सहकारिता मंत्रालय के स्थापना दिवस के राष्ट्रीय समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, मुख्यमंत्री कार्यालय, वित्त विभाग तथा सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लेकर विभिन्न योजनाओं और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।