जयपुर। राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी राजकीय अस्पताल में पांच दिनों के भीतर छह महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि बांसवाड़ा में भी दो प्रसूताओं ने दम तोड़ दिया। शुरुआती जांच के दौरान भीलवाड़ा अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में संक्रमण मिलने की पुष्टि हुई है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इन मौतों का संबंध संक्रमण से है या नहीं।
शुक्रवार को एक और प्रसूता की मौत के बाद भीलवाड़ा में 6 जुलाई से अब तक जान गंवाने वाली महिलाओं की संख्या छह पहुंच गई। सभी महिलाओं का सी-सेक्शन के जरिए प्रसव कराया गया था और ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। संक्रमण की आशंका सामने आने के बाद संबंधित ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी पर रोक लगा दी गई है। साथ ही एहतियात के तौर पर कुछ मरीजों को अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, ऑपरेशन थिएटर, सर्जिकल उपकरणों और इस्तेमाल की गई मशीनों के नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल जांच के लिए भेजे गए हैं। मामले की गहराई से जांच करने, संक्रमण के स्रोत का पता लगाने और अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन भी किया गया है।
घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार अस्पताल में प्रतिदिन करीब 30 से 40 सी-सेक्शन किए जाते हैं, जबकि उपलब्ध सर्जिकल सेट केवल पांच हैं। ऐसे में उपकरणों के स्टरलाइजेशन और संक्रमण नियंत्रण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संसाधनों के बीच बड़ी संख्या में ऑपरेशन होना संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की है। इसके अलावा ऑपरेशन के दौरान मरीजों को लगाए गए इंजेक्शनों के नमूने भी जांच के लिए एकत्र किए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी दवा या अन्य चिकित्सीय कारण की भी इसमें भूमिका रही है या नहीं।
उधर, बांसवाड़ा से भी शुक्रवार को दो प्रसूताओं की मौत की खबर सामने आई। दोनों महिलाओं ने सी-सेक्शन के जरिए अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार एक महिला एनीमिया से पीड़ित थी, जबकि दूसरी को उच्च रक्तचाप की समस्या थी। हालांकि दोनों मामलों की भी विस्तृत जांच की जा रही है। इससे पहले कोटा, बीकानेर और जोधपुर के सरकारी अस्पतालों में भी प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे राज्य की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
इन घटनाओं पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने मृतक महिलाओं के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की सूचना मिलने के बावजूद सी-सेक्शन जारी रखना और केवल पांच सर्जिकल सेट के सहारे प्रतिदिन 30 से 40 ऑपरेशन करना गंभीर लापरवाही का उदाहरण है।
अशोक गहलोत ने कहा कि भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत बेहद दुखद और चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोटा, बीकानेर और जोधपुर के बाद अब भीलवाड़ा की घटनाएं भी यह दर्शाती हैं कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं तो यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार इस समस्या को अपेक्षित गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तत्काल विशेषज्ञों की एक टीम राजस्थान भेजे, जो राज्य के अस्पतालों की व्यवस्थाओं का व्यापक मूल्यांकन करे और मातृ मृत्यु के कारणों की गहन जांच करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
गहलोत ने अपनी मांग को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को भी सोशल मीडिया के माध्यम से टैग किया और आग्रह किया कि माताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे।
इधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर जारी है। प्रयोगशाला से आने वाली रिपोर्टों और जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि संक्रमण के वास्तविक कारण और प्रसूताओं की मौत की वजह का वैज्ञानिक आधार पर पता लगाया जा रहा है, जिसके बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।