ऊर्जा संकट के दौर में भारत की कूटनीति बनी सबसे बड़ी ताकत, 40 से अधिक देशों से मिला ईंधन : पीएम मोदी

जयपुर/बालोतरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परियोजना राष्ट्र को समर्पित करते हुए वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत की रणनीतिक तैयारियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पूरी दुनिया अभूतपूर्व ऊर्जा संकट से जूझ रही थी, लेकिन भारत ने समय पर लिए गए फैसलों, प्रभावी कूटनीति और मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों के दम पर इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अस्थिरता का माहौल बन गया था। उनके अनुसार यह स्थिति 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट के रूप में सामने आई, लेकिन भारत ने दूरदर्शी नीति, सटीक आकलन और प्रभावी रणनीति अपनाकर इस कठिन दौर को अवसर में बदलने का काम किया।

संकट की घड़ी में काम आए भारत के वैश्विक संबंध

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भारत की विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ वर्षों से बने मजबूत संबंध सबसे बड़ी ताकत साबित हुए। उन्होंने बताया कि ऊर्जा संकट शुरू होने से पहले भारत लगभग 25 से 26 देशों से ईंधन आयात करता था, लेकिन हालात बदलते ही सरकार ने तेजी से अपने आयात स्रोतों का विस्तार किया।

उन्होंने कहा कि भारत की सक्रिय कूटनीति का ही परिणाम था कि युद्ध के दौरान देश ने 40 से अधिक देशों से ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की। इससे न केवल ऊर्जा उपलब्धता बनी रही, बल्कि देश में किसी बड़े संकट की स्थिति भी उत्पन्न नहीं हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पूरी दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रहित और देशवासियों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विपक्ष पर साधा परोक्ष निशाना

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान विपक्ष पर बिना नाम लिए निशाना भी साधा। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संकट के दौरान कुछ लोगों ने लगातार अफवाहें फैलाने, भ्रम पैदा करने और जनता के बीच डर का माहौल बनाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, लोगों को भड़काने का प्रयास हुआ, तरह-तरह की आशंकाएं जताई गईं और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिशें भी की गईं। लेकिन जिनकी मंशा गलत थी, वे अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सके। सरकार ने समय रहते प्रभावी कदम उठाए, जिसके कारण दूर-दराज़ के इलाकों में भी मामूली व्यवधानों को छोड़ दें तो ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी रही।

हर स्तर पर हुई लगातार निगरानी और रणनीतिक फैसले


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब कुछ लोग सार्वजनिक मंचों पर केवल अफवाहें फैलाने में व्यस्त थे, तब सरकार के विभिन्न विभाग दिन-रात हालात पर नजर बनाए हुए थे। उन्होंने बताया कि नीति निर्माण, प्रशासनिक व्यवस्था और कूटनीतिक स्तर पर बेहद संवेदनशील निर्णय लिए गए, जिनकी बदौलत देश को संभावित बड़े संकट से बचाया जा सका।

उन्होंने कहा कि उस कठिन दौर में धैर्य, समर्पण और समन्वय के साथ जो प्रयास किए गए, वे आने वाले समय में इतिहास का हिस्सा बनेंगे। उनके अनुसार संकट से निपटने के लिए उठाया गया हर कदम सोच-समझकर और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था।

देशवासियों के सहयोग के लिए जताया आभार

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जिस तरह धैर्य और विश्वास बनाए रखा, वही देश की सबसे बड़ी ताकत बना।

प्रधानमंत्री ने कहा, मैं देश के प्रत्येक नागरिक का आभार व्यक्त करता हूं। जिस प्रकार लोगों ने अफवाहों, डर और भ्रम फैलाने वाली ताकतों का डटकर सामना किया और देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों को नाकाम किया, उसी विश्वास और एकजुटता के बल पर भारत इस कठिन दौर से मजबूती के साथ बाहर निकल पाया। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी देशवासी इसी तरह एकजुट रहकर हर चुनौती का सामना करेंगे और भारत विकास की नई ऊंचाइयों को छूता रहेगा।