नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की है। जूली का कहना है कि देश में लगातार पेपर लीक के मामले बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन जवाबदेही तय करने में सरकार पूरी तरह विफल रही है।
उन्होंने कहा कि आज सत्ता में ऐसे लोग बैठे हैं जो जिम्मेदारी लेने के बजाय उससे बचते नजर आते हैं। जूली ने सवाल उठाते हुए कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आखिर क्यों बनाई गई थी? इसका उद्देश्य यही बताया गया था कि परीक्षा प्रणाली पारदर्शी होगी और पेपर लीक जैसी घटनाएं खत्म होंगी, लेकिन हकीकत इसके उलट दिख रही है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि जिम्मेदारी तय नहीं हो रही।
‘पेपर लीक पर कार्रवाई सिर्फ दिखावा’ — जूली का आरोपटीकाराम जूली ने राज्य सरकार के मंत्री मदन दिलावर के बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग यह कहते हैं कि “फोटो खिंच गई तो क्या हुआ” या “पेपर लीक बड़ी बात नहीं है”, तो यह बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक दर्जन से अधिक भाजपा नेताओं के साथ आरोपी की तस्वीरें सामने आने के बावजूद कार्रवाई में देरी की गई। जूली ने पूछा कि आखिर एफआईआर दर्ज करने में नौ दिन की देरी क्यों हुई और इस देरी के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।
“माफिया को बचाने की कोशिश क्यों?” — जूली का सवालनेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि पेपर लीक मामलों में असली सवाल यह है कि जिम्मेदार कौन है और किसकी जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक माफिया को बचाने की कोशिश की जा रही है और यह भी कहा जा रहा है कि बड़े नाम अभी सामने नहीं आए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर वह कौन अधिकारी था जिसके पास शिकायत पहुंची और उसके बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। जूली ने इसे प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ राजनीतिक दबाव का भी संकेत बताया।
राजस्थान कानून और जांच पर भी उठाए सवालजूली ने कहा कि राजस्थान में पेपर लीक के खिलाफ कड़ा कानून लागू है, जिसमें आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद यदि एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि यदि राजस्थान में केस दर्ज होता तो यहां केंद्र से भी सख्त कार्रवाई संभव थी। लेकिन जांच प्रक्रिया को जानबूझकर आगे नहीं बढ़ाया गया, ताकि कुछ लोगों को बचाया जा सके।
NTA और NEET पर भी निशानाटीकाराम जूली ने कहा कि सरकार ने जिस NTA को पारदर्शिता और निष्पक्ष परीक्षा के लिए बनाया था, वही संस्था अब सवालों के घेरे में है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नीट परीक्षा को लेकर पहले भी सरकार इसे पेपर लीक मानने से इनकार करती रही है।
उन्होंने SOG की जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह बढ़ता जा रहा है। जूली ने आरोप लगाया कि पूरा मामला गंभीर होने के बावजूद इसे हल्के में लिया जा रहा है, जो देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।