NEET पेपर लीक केस में बड़ा खुलासा: मांगीलाल के बेटे विकास पर भी जांच का शिकंजा, मेडिकल कॉलेज से 4 महीने से था गायब

NEET 2026 पेपर लीक मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सीबीआई की कार्रवाई तेज होती जा रही है। इस पूरे प्रकरण में पहले ही मुख्य आरोपी मांगीलाल बिवाल को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसे पेपर लीक का सरगना बताया जा रहा है। अब जांच की आंच उनके बेटे विकास बिवाल तक भी पहुंच गई है। विकास वर्तमान में सवाई माधोपुर के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है, लेकिन उससे जुड़े कई तथ्य जांच एजेंसियों के लिए नए सवाल खड़े कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार विकास को एक औसत क्षमता वाला छात्र माना जाता रहा है और कॉलेज रिकॉर्ड में जनवरी से उसकी उपस्थिति बेहद कम दर्ज की गई है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि NEET परीक्षा के तुरंत बाद वह कुछ समय तक नियमित रूप से कॉलेज आता रहा, लेकिन इसके बाद अचानक स्थिति बदल गई। बताया जा रहा है कि 11 मई के बाद से वह बिना किसी सूचना के कॉलेज से पूरी तरह गायब है। इस अचानक अनुपस्थिति ने सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज को भी जांच के दायरे में लाने की संभावना को जन्म दे दिया है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

कॉलेज रिकॉर्ड और प्रदर्शन पर उठे सवाल

विकास बिवाल के शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उसे एक औसत स्तर का छात्र माना जाता रहा है, लेकिन वर्ष 2025 में NEET परीक्षा में उसके चयन ने सभी को चौंका दिया था, जहां उसने 86 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।

जांच एजेंसियों का मानना है कि मौजूदा तथ्यों के आधार पर 2025 की परीक्षा की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। सीबीआई इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर परीक्षा परिणाम और वास्तविक शैक्षणिक प्रदर्शन के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे संभव हुआ।

चार महीने तक कॉलेज से अनुपस्थित रहा विकास

कॉलेज प्रशासन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, जनवरी से लेकर 30 अप्रैल तक विकास की उपस्थिति लगभग नगण्य रही है। न केवल नियमित कक्षाएं, बल्कि समय-समय पर होने वाले टेस्ट और मूल्यांकन में भी वह अनुपस्थित पाया गया।

जो कुछ परीक्षाओं में वह शामिल हुआ, उनमें उसका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और औसतन केवल लगभग 30 प्रतिशत अंक ही प्राप्त कर पाया। इसके बावजूद उसके मेडिकल कॉलेज में दाखिले और चयन को लेकर अब गंभीर संदेह खड़े हो रहे हैं। 11 मई के बाद से उसके लगातार गायब रहने ने मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई द्वारा उसकी हिरासत की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि इस पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

क्या 2025 NEET पेपर भी था प्रभावित?

इस पूरे मामले ने अब केवल 2026 NEET पेपर लीक तक सीमित रहना बंद कर दिया है। सीबीआई जांच में सामने आ रहे नए तथ्यों के बाद 2025 की परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

परिवार के कई सदस्यों के एक ही परीक्षा प्रणाली में चयन और उच्च अंकों के साथ मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ने जांच को और गहरा बना दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, दिनेश, मांगीलाल और उनके दिवंगत बड़े भाई घनश्याम के परिवार के कुल सात सदस्य पिछले दो वर्षों में NEET परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से पांच का चयन सफल रहा।
10वीं-12वीं के औसत छात्र ने किया NEET क्लियर

बिवाल परिवार से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों को एक और चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है। वर्ष 2025 की NEET परीक्षा में इस परिवार के कुल पांच सदस्य सफल घोषित हुए थे। इनमें विकास बिवाल का चयन सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज में हुआ, जबकि परिवार के अन्य सदस्य अलग-अलग प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों तक पहुंचे। किसी का दाखिला एसएमएस मेडिकल कॉलेज में हुआ, तो किसी को मुंबई और वाराणसी जैसे बड़े मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिला। एक ही परिवार के इतने सदस्यों का एक ही वर्ष में मेडिकल शिक्षा के विभिन्न संस्थानों तक पहुंचना अब जांच एजेंसियों के लिए गंभीर जांच का विषय बन गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि 2025 में मांगीलाल के बेटे विकास का चयन सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज में हुआ था। वहीं मांगीलाल की बेटी प्रगति का प्रवेश दौसा मेडिकल कॉलेज में मिला। दिनेश की बेटी गुंजन को वाराणसी मेडिकल कॉलेज आवंटित किया गया, जबकि घनश्याम की बेटी पलक को एसएमएस मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला। इसके अलावा घनश्याम की दूसरी बेटी सानिया वर्तमान में मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में अध्ययन कर रही है।

औसत छात्र से मेडिकल कॉलेज तक का सफर बना जांच का केंद्र

सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि यह सभी छात्र, जो एक ही परिवार से जुड़े हैं, अपने स्कूल स्तर पर औसत प्रदर्शन वाले माने जाते थे। इसके बावजूद NEET जैसी कठिन राष्ट्रीय परीक्षा को एक साथ सफलतापूर्वक पास करना अब जांच एजेंसियों के लिए संदेह का विषय बन गया है।

जांच में प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास बिवाल ने 10वीं कक्षा में 63 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 55 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। इसके अलावा NEET-2024 परीक्षा में उसे कुल 720 में से केवल 270 अंक ही मिले थे, जो औसत स्तर का प्रदर्शन माना जाता है।

पैटर्न को लेकर उठ रहे सवाल

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कैसे एक ही परिवार के कई सदस्य, जिनका शैक्षणिक रिकॉर्ड औसत रहा है, एक ही वर्ष में मेडिकल कॉलेजों में सफल प्रवेश हासिल कर पाए। यह पैटर्न जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सुराग के रूप में देखा जा रहा है।

सीबीआई और अन्य जांच इकाइयां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह केवल संयोग है या फिर इसके पीछे किसी बड़े स्तर की अनियमितता मौजूद है। फिलहाल पूरे मामले की हर एंगल से गहन जांच जारी है और कई दस्तावेजों की जांच की जा रही है।