करौली। राजस्थान के करौली जिले में एक भीषण हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां पलभर में छीन लीं। भोपर नदी के समीप 11 केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन अचानक टूटकर सड़क पर गिर गई। उसी समय वहां से गुजर रही एक मोटरसाइकिल बिजली के प्रवाहित तार की चपेट में आ गई, जिससे बाइक में आग लग गई और उस पर सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में चाचा-भतीजे भी शामिल हैं। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया है। पीड़ित परिवार और ग्रामीण पिछले करीब 18 घंटे से मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
हादसे के बाद परिजनों ने शवों का अंतिम संस्कार या पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और घटनास्थल पर ही धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं करता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी प्रत्येक मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग पर अड़े हुए हैं। टोडाभीम के डीएसपी मुरारी लाल मीणा के अनुसार, मृतकों की पहचान बालघाट थाना क्षेत्र के अखड़ा गांव निवासी 45 वर्षीय रामबाबू, 22 वर्षीय विष्णु और 44 वर्षीय चौबे जाटव के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, तीनों सोमवार शाम हिंडौन से दिहाड़ी मजदूरी का काम खत्म कर मोटरसाइकिल से अपने गांव लौट रहे थे। जैसे ही वे भोपर नदी के पास कच्चे रास्ते पर पहुंचे, वहां पहले से टूटी हुई 11 केवी बिजली लाइन सड़क पर गिरी हुई थी। बाइक उस जीवित बिजली तार के संपर्क में आते ही तीनों करंट की चपेट में आ गए। तेज करंट लगने के साथ ही मोटरसाइकिल में आग भड़क उठी। आसपास मौजूद लोगों ने मिट्टी डालकर आग बुझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और तीनों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चौबे जाटव, विष्णु के चाचा थे, जबकि रामबाबू उनके पड़ोसी थे। यह दर्दनाक हादसा सोमवार शाम करीब पांच बजे हुआ। घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित बिजली विभाग के फीडर इंचार्ज को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बिजली लाइन टूटने के पीछे क्या कारण रहे।
दुर्घटना के बाद गांव में शोक और गुस्से का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने से साफ इनकार कर दिया और मौके पर ही धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन पहले उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी का आश्वासन दे, तभी वे शव उठाने की अनुमति देंगे। इसी मांग को लेकर उनका विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
धरने की जानकारी मिलते ही टोडाभीम विधायक घनश्याम महर और हिंडौन विधायक अनीता जाटव भी मौके पर पहुंचे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और उनकी मांगों का समर्थन करते हुए प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की अपील की।
उधर, एसडीएम अमन चौधरी के नेतृत्व में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन देर रात तक भी कोई सहमति नहीं बन सकी। परिजन अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। विधायक घनश्याम महर ने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रशासन मुआवजे और सरकारी नौकरी को लेकर लिखित आश्वासन नहीं देगा, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। इसी कारण शव अब भी नदी किनारे धरना स्थल पर रखे हुए हैं।
स्थिति को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। करौली के पुलिस अधीक्षक मुरारी लाल मीणा, एसडीएम अमन चौधरी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतेंद्र पाल सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं। प्रशासन प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है, जबकि पूरे घटनाक्रम पर उच्च स्तर से भी नजर रखी जा रही है।