नानी के घर की यादों में डूबा जयपुर, ‘बज़्म’ ने बचपन की सुनहरी गर्मियों को किया जीवंत

जयपुर।बचपन की गर्मियों की छुट्टियाँ, नानी के घर का स्नेह, आँगन में गूंजती खिलखिलाहट और परिवार के साथ बिताए गए अनमोल पल जीवन की ऐसी धरोहर हैं, जो समय बीतने के साथ और भी मूल्यवान हो जाती हैं। जयपुर में आयोजित ‘नानी का घर’ कार्यक्रम ने इन्हीं सुनहरी यादों को फिर से जीवंत कर दिया।
कविता, कहानी, संगीत और पारंपरिक खेलों के माध्यम से यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक संध्या नहीं रहा, बल्कि लोगों को अपने बचपन, रिश्तों की गर्माहट और उन भावनाओं से दोबारा जोड़ने का एक भावपूर्ण प्रयास बन गया, जिन्हें आधुनिक जीवन की भागदौड़ में कहीं पीछे छोड़ दिया गया है। अवसर था 14 जून को निर्माण नगर स्थित मनवास में आयोजित बज़्म के विशेष आयोजन ‘नानी का घर’ का, जिसने उपस्थित लोगों को एक भावनात्मक और यादगार शाम दी।
मोहम्मद उजैर अली और डिंपल नैनानी द्वारा स्थापित बज़्म पिछले कुछ वर्षों से जयपुर में कहानी, कविता और सांस्कृतिक अनुभवों को नए रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ‘नानी का घर’ इसी श्रृंखला का एक अनूठा आयोजन था, जिसका उद्देश्य लोगों को उन स्मृतियों तक वापस ले जाना था जो समय के साथ धुंधली तो हो जाती हैं, लेकिन कभी मिटती नहीं।

मानवास, जयपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक खेलों और गतिविधियों का विशेष अनुभव क्षेत्र बनाया गया था, जहाँ लोगों ने कंचे, स्टापू, गुट्टे, लट्टू, ब्रेनवीटा, गुल्लक पेंटिंग और ब्रेसलेट मेकिंग जैसी गतिविधियों में भाग लिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में अनेक कलाकारों ने नानी, बचपन और परिवार से जुड़ी यादों को मंच पर जीवंत किया।

रोशनी ने कहानी के माध्यम से माँ के नानी में बदल जाने की संवेदनशील यात्रा को प्रस्तुत किया। किरण की कविता ने इस विचार को व्यक्त किया कि जहाँ बचपन सुरक्षित रह जाता है, वही स्थान हमेशा नानी का घर बना रहता है।

मेघा ने ‘यादों का मौसम’ के माध्यम से बचपन की छुट्टियों, नाना-नानी और पारिवारिक स्मृतियों को स्वर दिया। मानसी ने आम पापड़, गर्मियों और अपनी नानी की यादों से सजी एक भावपूर्ण तस्वीर श्रोताओं के सामने रखी। अंजली की तरन्नुम में प्रस्तुत कविता ने जीवन और आत्मबोध के विभिन्न आयामों को छुआ।

कुणाल की कहानी ने अपनी नानी के निधन से जुड़ी स्मृतियों के माध्यम से दर्शकों को भावुक कर दिया। कोमल ने अपनी नानी की कहावतों, लोकाचार और जीवन-ज्ञान को साझा करते हुए सभी को अपनी गर्मियों की छुट्टियों में वापस पहुँचा दिया। कार्यक्रम का समापन अजीत के संगीतमय प्रस्तुतिकरण से हुआ, जिसने श्रोताओं को पुराने दिनों की यादों में डुबो दिया।



कार्यक्रम के दौरान हुई अचानक बारिश भी इस अनुभव का हिस्सा बन गई। इसके बावजूद दर्शक अंत तक जुड़े रहे और पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।

बज़्म के संस्थापक मोहम्मद उजैर अली और डिंपल नैनानी ने कहा कि ‘नानी का घर’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक साझा स्मृति को फिर से जीने का प्रयास था।

उन्होंने कहा, “कुछ जगहें सिर्फ जगहें नहीं होतीं, वे स्वयं एक एहसास होती हैं। ‘नानी का घर’ उन एहसासों को फिर से जीने का एक प्रयास था, जिन्हें हम अपने साथ लेकर बड़े होते हैं।”

बज़्म आगे भी ऐसे अनुभवों का निर्माण करता रहेगा जो कविता, कहानी और मानवीय जुड़ाव के माध्यम से लोगों को एक-दूसरे के करीब लाएँ।