जयपुर में सजेगा ब्रज का रंगमंच: गोविंद देव जी मंदिर में भव्य फागोत्सव, 500 कलाकार होंगे शामिल

फाल्गुन का महीना आते ही गुलाबी नगरी जयपुर का वातावरण बदलने लगता है। हवाओं में गुलाल की महक घुल जाती है, मंदिरों में राग-रंग की स्वर लहरियां गूंजने लगती हैं और ठाकुर जी का दरबार उत्सवधर्मिता में डूब जाता है। यह केवल होली का पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत उत्सव है, जिसकी जड़ें ब्रज भूमि से जुड़ी हैं। इस वर्ष फाल्गुन की अष्टमी, नवमी और दशमी को ऐतिहासिक गोविंद देव जी मंदिर में पारंपरिक फागोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लगभग 500 कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

ब्रज से जयपुर तक परंपरा की विरासत


इतिहास के अनुसार जब ब्रज से श्रीकृष्ण के विग्रह—विशेष रूप से गोविंद देव जी और गोपीनाथ जी—जयपुर लाए गए, तो उनके साथ वहां की जीवंत सांस्कृतिक परंपराएं भी यहां स्थापित हो गईं। फागोत्सव उसी विरासत का हिस्सा है। गौड़ीय संप्रदाय के मंदिरों में जहां कृष्ण के ब्रज स्वरूप की आराधना होती है, वहां फाल्गुन में फाग का उत्सव उसी रस, उसी उल्लास और उसी भक्ति भाव से मनाया जाता है।

तीन दिन रंग, रस और राग का संगम

आयोजक गौरव धामाणी के अनुसार 24, 25 और 26 मार्च को अष्टमी, नवमी और दशमी के अवसर पर यह विशेष आयोजन होगा। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगा। इस बार देशभर से कलाकार जयपुर पहुंचेंगे—ब्रज क्षेत्र, दिल्ली, कोलकाता और अहमदाबाद के नर्तक और गायक मंच सजाएंगे।

फागोत्सव में विभिन्न घरानों की कथक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। लट्ठमार होली और पुष्प होली की झलक भी भक्तों को देखने को मिलेगी। नृत्य में अविनाश शर्मा, गुलाबो गिरधारी महाराज और स्वाति गर्ग जैसे कलाकार भाग लेंगे, जबकि गायन में जगदीश शर्मा और कुंज बिहारी जादू जैसे प्रतिष्ठित गायक अपनी स्वरांजलि अर्पित करेंगे। कई परिवार पीढ़ियों से इस सेवा से जुड़े हैं, जो इस परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है।

रचना झांकी में साकार होगा ब्रज

इन दिनों मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां चल रही हैं। ठाकुर जी का शृंगार गुलाल और अबीर से किया जा रहा है। सूती वस्त्रों पर पारंपरिक रंगों से कृष्ण लीलाओं को उकेर कर ‘रचना झांकी’ सजाई जा रही है। इस झांकी में श्रीकृष्ण और राधारानी के संग होली खेलने का प्रतीकात्मक दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं को ब्रज की फाग परंपरा का सजीव अनुभव कराएगा।

राजपरिवार से जुड़ी रही परंपरा

जयपुर में फागोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शाही परंपरा का भी हिस्सा रहा है। सवाई जयसिंह के समय से यह उत्सव मनाया जाता रहा, जबकि सवाई प्रताप सिंह के काल में इसे विशेष वैभव प्राप्त हुआ। इतिहासकारों के अनुसार फाल्गुन उत्सव के दौरान महाराजा स्वयं ठाकुर जी को फूलों से अभिषेक करते थे।

जयपुर के ब्रजनिधि मंदिर का मंडप विशेष रूप से फागोत्सव को ध्यान में रखकर निर्मित किया गया था। इसी प्रकार आनंद कृष्ण बिहारी मंदिर और रामचंद्र जी के मंदिर में भी यह परंपरा जीवित है। देवस्थान विभाग इन सभी मंदिरों में फागोत्सव का आयोजन करेगा और इसके लिए अलग बजट भी स्वीकृत किया गया है।